राजीव गांधी हत्याकांड की आरोपी नलिनी (फाइल फोटो)
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रही दोषियों में से एक नलिनी श्रीहरन ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। नलिनी ने दोषी एजी पेरारिवलन की तर्ज पर रिहाई की मांग की। नलिनी ने सह-दोषी एजी पेरारिवलन के मामले में शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला दिया जहां उन्हें रिहा किया गया था। इससे पहले नलिनी ने उसी राहत की मांग करते हुए मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, हालांकि अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।
मद्रास हाई कोर्ट ने याचिक ठुकराई थी
मद्रास हाई कोर्ट ने याचिका को ठुकराते हुए कहा था कि उसके पास संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियां नहीं हैं और इसलिए वह उनकी रिहाई का आदेश नहीं दे सकता, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2022 में पेरारिवलन के लिए किया था। इससे पहले एक अन्य सह-दोषी पी रविचंद्रन ने भी राहत के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। 30 साल से जेल में बंद रविचंद्रन ने औपचारिक रिहाई के अपने मामले के निष्कर्ष तक पहुंचने तक अंतरिम जमानत मांगी। हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर उनकी याचिका पेरारीवलन की रिहाई पर आधारित है तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
18 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एजी पेरारिवलन को रिहा करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया था, जो हत्या के मामले में सात दोषियों में से एक था। पेरारिवलन की रिहाई के बाद रविचंद्रन ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को एक पत्र भेजा था, जिसमें उन सहित बाकी छह दोषियों की रिहाई की मांग की गई थी और जिक्र किया था कि राज्यपाल ने रिहाई की फाइलों को तीन साल से अधिक समय तक बिना विचार किए रखा है।
सितंबर 2018 में तमिलनाडु सरकार द्वारा की गई सिफारिश के आधार पर जेल से समय से पहले रिहाई के लिए पेरारिवलन की याचिका पर फैसला करते हुए शीर्ष अदालत ने उसकी रिहाई का आदेश दिया, जबकि छह अन्य दोषी जेल में हैं। रविचंद्रन ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपनी अपील में शीर्ष अदालत के पेरारीवलन के आदेश का हवाला दिया है। राजीव गांधी की 21 मई 1991 की रात को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक महिला आत्मघाती हमलावर द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस हमलावर की पहचान धनु के रूप में हुई थी।