फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजस्थान: विवाह पंजीकरण विधेयक से क्यों मचा बवाल, गहलोत को क्यों हटना पड़ा पीछे

Tue, 12 Oct 2021 02:13 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

विधेयक को वापस लेने की मांग के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को कहा कि सरकार राज्यपाल से विधेयक वापस करने का अनुरोध करेगी। इस विधेयक का विरोध करने वालों का यह तर्क था कि बाल विवाह को रोकने के बजाए सरकार बाल विवाहों को पंजीकृत करके उसे ‘कानूनी जामा’ पहननाने की कोशिश कर रही है।

 
विज्ञापन
अशोक गहलोत - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को कहा कि विधानसभा में पिछले महीने पारित 'राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण (संशोधन) विधयेक 2021’  को फिर से जांचने के लिए वापस लेने का फैसला किया है। गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार राज्यपाल से विधेयक को कानूनी परामर्श के लिए वापस करने का आग्रह करेगी।
विज्ञापन


विवाहों के अनिवार्य पंजीकरण पर 2009 के कानून में संशोधन किया था, जिसके बाद देश भर में हंगामा मच गया और यह विधेयक विवादों में घिर गया। क्योंकि इससे बाल विवाह को वैधता दिए जाने वाला एक कदम बताया गया था। विधेयक भाजपा के विरोध के बीच पारित किया गया था। भाजपा ने इसे काला कानून बनाते हुएऔर बाल विवाह को वैध बनाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

वहीं नागरिक समाज, महिला संगठनों और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने गहलोत को इस विधेयक को वापस लेने के लिए लिखा था। बाल विवाह को वैध बनाने की आशांका के मद्देनजर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। देश के मौजूदा कानून के मुताबिक बाल विवाह अपराध है लेकिन इसे अवैध नहीं माना जाता है और इसे सामाजिक मंजूरी मिली हुई है।
विज्ञापन


 

बाल विवाह - फोटो : Pixabay
कांग्रेस के अंदर भी हो रहा विरोध
बताया जा रहा है इस विधेयक को लेकर केवल भाजपा या सामाजिक संगठनों का ही नहीं बल्कि कांग्रेस के अंदर भी विरोध शुरु हो गया था। हालांकि यह विरोध खुलकर तो सामने नहीं आया लेकिन इसे लेकर विवाद बढ़ने पर कांग्रेस विधायक भी चिंता में आ गए थे। राजस्थान में उदयपुर संभाग की वल्लभनगर और धरियावद दो विधानसभा सीटों पर 30 अक्तूबर को होने वाले उपचुनाव को देखते हुए भी कांग्रेस विधायक इस विधेयक को लेकर घबरा उठे। 

मिली जानकारी के मुताबिक कुछ विधायकों को यह खतरा महसूस हुआ कि केंद्र की भाजपा सरकार जिस तरह बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का अभियान चला रही है उसे देखते हुए भाजपा कांग्रेस पर बाल विवाह को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर चुनाव में भी इसका इस्तेमाल कर सकीत है। इसलिए उन्होंने भी सरकार से यह विधेयक वापस लेने का दबाव बढ़ाया। सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ पार्टी विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने भी यह मुद्दा उठाया जिसके बाद गहलोत को इस विधेयक को वापस लेना पड़ा। 
 
विज्ञापन

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र - फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल नामंजूर कर सकते थे विधेयक
यह विधेयक राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था कि और माना जा रहा था कि राज्यपाल कलराज मिश्र इस यह विधेयक को नामंजूर कर देंगे। इससे भी पहले से आलोचनाओं से घिरी राज्य सरकार की भद्द पिट सकती थी। लिहाजा सरकार ने इस विवाद को खत्म करने के लिए विधेयक को राजभवन से वापस बुलाने का फैसला किया।  

संशोधन क्या है?
राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2021 में राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2009 की धारा आठ में संशोधन है, जिसमें दूल्हा और दुल्हन को शादी के बंधन में बंधने के लिए कानूनी उम्र नहीं होने पर भी उनके माता-पिता या अभिभावक को निर्धारित अवधि (30) दिन के अंदर उनकी शादी के पंजीकरण की अनुमति दी गई है। इसके लिए निर्धारित अवधि  के अंदर एक आवेदन जमा कराना था। इस आधार पर रजिस्ट्रेशन अधिकारी बाल विवाह को रजिस्टर्ड कर देते। 

इसकी आलोचना क्यों की गई?
आलोचकों का कहना है कि बाल विवाह का अनिवार्य पंजीकरण इसे वैध बना देगा। कार्यकर्ताओं का यह कहना था कि हम कुरीतियों को खत्म करन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या बढ़ाने के। वहीं बाल और महिला संगठनों का यह तर्क था इससे लोग बाल विवाह को मान्यता दिलाने की कोशिश में लग जाएंगे और हो सकता है कि बाल विवाह का चलने और तेज हो जाए। 

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें