अग्निपथ पर देश को गुमराह कर रहे हैं- राजनाथ सिंह
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्निवीर योजना को लेकर राहुल गांधी के बयानबाजी के बाद मोर्चा संभाला और कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी राष्ट्रीय सुरक्षा और अग्निपथ पहल के संवेदनशील मुद्दे पर देश को गुमराह कर रहे हैं। दरअसल केंद्रीय बजट पर राहुल गांधी की टिप्पणी के तुरंत बाद लोकसभा में बोलते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष के नेता ने बजट के बारे में बहुत सारी गलतफहमियां फैलाने की कोशिश की है और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब बहस का जवाब देंगी तो स्पष्टीकरण देंगी।
'अग्निवीर मुद्दे पर देश को गुमराह करने की कोशिश'
वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, कि हमारे जवान देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का बहुत संवेदनशील मुद्दा है। अग्निवीर मुद्दे पर देश को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। जब भी आप अनुमति देंगे मैं इस मुद्दे पर बयान देने के लिए तैयार हूं। बता दें कि राहुल गांधी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने सदन को बताया था कि अग्निवीर शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया था, लेकिन यह केवल बीमा भुगतान था, मुआवजा नहीं।
अग्निपथ योजना में चार साल की भर्ती का प्रावधान
बता दें कि 14 जून 2022 को घोषित अग्निपथ योजना में साढ़े 17 से 21 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं को सिर्फ चार साल के लिए भर्ती करने का प्रावधान है, जिसमें 25 प्रतिशत को 15 साल के लिए और बनाए रखने का प्रावधान है। हालांकि बाद में केंद्र सरकार ने ऊपरी आयु सीमा को बढ़ाकर 23 वर्ष कर दिया था।
अग्निवीरों से नहीं लिया जाता बीमा का प्रीमियम
इस बीच, सोमवार को अधिकारियों ने बताया कि अगर कोई अग्निवीर सक्रिय सैन्य सेवा के दौरान शहीद होता है, तो संबंधित मानदंडों के तहत इस योजना में उसके परिजनों को 1 करोड़ रुपये से अधिक देने का प्रावधान किया गया है, जिसमें 48 लाख रुपये का बीमा है, जिसका प्रीमियम अग्निवीरों से नहीं लिया जाता है। इसमें 44 लाख रुपये का अनुग्रह भुगतान, लगभग 11.70 लाख रुपये की कुल सेवानिवृत्ति पैकेज राशि और मृत्यु के बाद सेवा न किए गए अवधि का शेष वेतन के अलावा 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का बीमा कवर भी शामिल है, जिसके लिए सरकार ने बैंकों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि अग्निवीरों को इस बीमा के लिए कोई प्रीमियम भी नहीं देना पड़ता है।