केंद्र द्वारा पंजाब में चालू खरीफ सीजन में धान खरीद लक्ष्य 170 लाख टन निर्धारित करने के बाद से राज्य सरकार इसे बढ़ाकर 190 लाख टन किए जाने का दबाव बना रही है। पिछले वर्ष पंजाब में सरकारी धान खरीद राज्य में कुल उत्पादन से भी अधिक की गई। इस कुल उत्पादन में बासमती भी शामिल है, जिसकी सरकारी खरीद नहीं होती। यही हाल हरियाणा का है।
खरीद की निगरानी कर रहे हैं
हरियाणा के कृषि महानिदेशक एवं सचिव हरदीप सिंह बताते हैं, राज्य में ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ पर किसान पहले रजिस्टर करते हैं, उसी हिसाब से खरीद होती है। इस बार अभी तक जितनी खरीद हुई है, वो उत्पादन से कम है। खरीद में कड़ाई हो रही है। खरीद पर निगरानी रख रहे हैं।
हरियाणा में खरीद का रिकॉर्ड टूटा
राज्य में पिछले वर्षों में मार्केटेबल सरप्लस का 300% तक धान की खरीद हुई। हरियाणा में सरकारी खरीद करने वाली एजेंसी हैफेड के सीजीएम आरपी साहनी कहते हैं, जितना भी धान मंडी के अंदर इलेक्ट्रॉनिक गेट पास से आता है, उसे ही खरीदते हैं और ऑनलाइन पैसा चला जाता है। हमारा इतना ही काम है।
नीचे से लेकर ऊपर तक सब मिले हैं
पंजाब में कृषि विभाग के एक उच्च अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, पंजाब में 30,000 आढ़ती हैं, अगर हर किसी ने दो ट्रक भी अधिक खरीद लिया तो 60,000 ट्रक हो गया। ये ऐसे ही चलता रहेगा, नीचे से लेकर ऊपर तक सब मिले हुए हैं।वहीं, पंजाब में खन्ना मंडी के चेयरमैन गुरदीप सिंह बताते हैं, फिरोजपुर में ऐसी खरीद ज्यादा होती है। लेकिन इस बार सीमा पर काफी सख्ती है।
उत्तर प्रदेश-बिहार में अपनी भंडारण क्षमता नहीं
पंजाब और हरियाणा की भंडारण की अधिक क्षमता है जबकि यूपी-बिहार में ऐसा नहीं है। पंजाब में एफसीआई की 139 लाख टन व राज्य एजेंसियों की 113.4 लाख टन क्षमता है। हरियाणा में एफसीआई की 70.09 लाख टन और राज्य एजेसियों की 89.5 लाख टन भंडारण क्षमता है। यूपी में सिर्फ एफसीआई की 62.2 लाख टन और बिहार की 12.27 लाख टन और राज्य एजेंसियों की 4.26 लाख टन ही क्षमता है।
पंजाब को एफसीआई से हर साल मोटी कमाई
एफसीआई के अधिकारी बताते हैं, मंडी फीस और रूरल डेवलपमेंट टैक्स के रूप में पंजाब हर साल 1900 करोड़ रुपये एफसीआई से वसूलता है। किसान, मजदूर, ढुलाई वाले, आढ़तिया कमीशन, प्रोक्योरमेंट एजेंसियां और प्रशासनिक चार्ज मिलाकर हर साल 65-70 हजार करोड़ रुपये पंजाब को सीधे जाते हैं। पंजाब में आढ़तियों का कमीशन सालाना 1200 करोड़ रुपया है।