16 में से केवल दो कंपनियों ने ही दिखाई दिलचस्पी
अक्तूबर में रेल मंत्रालय के 12 क्लस्टरों के लिए 15 फर्मों से 120 आवेदन प्राप्त हुए हैं। नवंबर में इन 120 आवेदनों में से 102 को आरएफक्यू में हिस्सा लेने के लिए पात्र पाया गया। सभी क्लस्टरों को फरवरी 2021 तक परियोजना आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया था। जिन आवेदकों ने आरएफक्यू जमा कराए थे, उनमें मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर, साईनाथ सेल्स एंड सर्विसेज, आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स, भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी), जीएमआर हाईवेज, वेलस्पन एंटरप्राइजेज, गेटवे रेल फ्रेट और क्यूब हाईवेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर-3 शामिल थीं।
एल एंड टी इंफ्रास्ट्रक्चर, आरके एसोसिएट्स एंड होटलियर्स, पीएनसी इन्फ्राटेक, अरविंद एविएशन और बीएचईएल आदि भी इसके लिए पात्र पाई गई थीं। लेकिन पिछले महीने जब वास्तविक बोली खोली गई तो आईआरसीटीसी और एमईआईएल ने ही बोलियां लगाईं। इससे लगा कि निजी रेल चलाने की परियोजना को ठंडी प्रतिक्रिया मिली है। इसके परिचालन के लिए आईआरसीटीसी साझेदार भी तलाश रही थी, ताकि निजी रेल के परिचालन में आने वाली लागत का वहन किया जा सके।
गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में रेल मंत्रालय ने 109 जोड़ी यात्रा मार्गों पर ट्रेन चलाने के लिए निजी क्षेत्रों से आवेदन पत्र आमंत्रित किऐ थे। इनमें 151 आधुनिक रेलगाड़िय़ों को शामिल किया जाना था। अनुमान के मुताबिक इस परियोजना में निजी क्षेत्र से करीब 30,000 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है।