सर्वोच्च न्यायालय ने करीब 47 साल पहले अपने ऐतिहासिक फैसले में पहली बार जिक्र किया था कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है। इसी कानूनी सिद्धांत का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदियों को जमानत दी।
यह अवधारणा 1977 में न्यायमूर्तिक वी.आर. कृष्ण अय्यर द्वारा 'राजस्थान राज्य बनाम बालचंद उर्फ बलिया' मामले में लिखे गए फैसले में सामने आई थी। तब से बड़ी संख्या में मामलों में अदालतों में इसका जिक्र किया गया है।
देश की जेलों में जमानत के अभाव में बड़ी संख्या में विचाराधीन कैदी बंद हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2022 तक देश में विचाराधीन कैदियों की कुल संख्या 4,34,302 थी। इस संख्या में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन, बीआरएस नेता के.कविता, तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी.सेंथिल बालाजी, टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल और यूनिटेक के प्रमोटर संजय और अजय चंद्रा जैसे कुछ जाने-माने लोग भी शामिल हैं।
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा, द्रमुक नेता कनिमोई, आप सांसद संजय सिंह, कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, गौतम नवलखा सहित राजनेताओं-कार्यकर्ताओं की लंबी सूची है, जिनमें जमानत देते समय 'जमानत नियम है और जेल अपवाद है' का जिक्र किया गया।
शीर्ष अदालत ने नवंबर 2011 के अपने फैसले में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में संजय चंद्रा सहित पांच आरोपियों को जमानत दी थी और कहा था कि वह बार-बार कहती है कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है। हालांकि, कुछ मौकों पर अदालतों ने इस सिद्धांत को यह कहते हुए लागू नहीं किया कि अलग-अलग मामलों की प्रकृति अलग-अलग हो सकती है।
पत्रकार अर्नब गोस्वामी और दो अन्य की अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के अपने नवंबर 2020 के फैसले में शीर्ष अदालत ने निजी स्वतंत्रता के महत्व और बार-बार दोहराए जाने वाले इस सिद्धांत पर प्रकाश डालने के लिए विभिन्न फैसलों का जिक्र किया था।
आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले में पी. चिदंबरम को जमानत देते हुए दिसंबर 2019 के अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था, हालांकि आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति का है। लेकिन जमानत से जुड़ा न्यायशास्त्र वही रहता है। वह कहता है कि जमानत देना नियम है और इनकार अपवाद है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आरोपी के पास निष्पक्ष सुनवाई का अवसर है।
मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने इस साल मार्च में गुजरात के कच्छ जिले के धोरडो में अखिल भारतीय जिला न्यायाधीशों के सम्मेलन में अपने संबोधन में जिक्र किया था कि जमानत नियम है, जेल अपवाद है। उन्होंने कहा था कि यह पुराना सिद्धांत अब अपनी जमीन खो रहा है, क्योंकि जिला अदालतें निजी स्वतंत्रता से जुड़े मामलों से निपटने में हिचकिचा रही हैं।