देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार को 84 साल की आयु में निधन हो गया। राजनीतिक भेदभाव से परे हमेशा देशहित की सोच रखने वाले प्रणब मुखर्जी देश के 13वें राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने कुछ ऐसे फैसले लिए थे जिनके लिए वह हमेशा लोगों की स्मृतियों में बने रहेंगे और उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।
कसाब, अफजल गुरु और याकूब मेनन को फांसी
राष्ट्रपति रहते हुए मुखर्जी ने आतंकवादी अजमल कसाब, अफजल गुरु और याकूब मेनन को फांसी दिलवाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने मुंबई 26/11 आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब, संसद भवन पर हमले के दोषी अफजल गुरु और 1993 मुंबई सीरियल धमाकों के दोषी याकूब मेनन की फांसी की सजा पर तुरंत मुहर लगाई थी। कसाब को 2012 में, अफजल को 2013 में आर मेनन को 2015 में फांसी दी गई थी।
दुष्कर्म के दो मामलों में क्षमा देने से किया था इनकार
राष्ट्रपति पद पर पूरे कार्यकाल के दौरान मुखर्जी के पास करीब 37 क्षमा याचिकाएं आई तीं। इनमें से अधिकतर में उन्होंने अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा था। कार्यकाल की समाप्ति के दौरान उनके पास दुष्कर्म के दो मामलों में क्षमा याचिकाएं आई थीं, लेकिन इन मामलों में उन्होंने क्षमा देने से साफ इनकार कर दिया था। इनमें से एक मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का था तो दूसरा महाराष्ट्र के पुणे का था।
राष्ट्रपति रहते हुए चार लोगों को दिया जीवनदान
प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति रहते हुए चार लोगों की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदला था। उनके इस फैसले को अब भी साहसिक निर्णय माना जाता है। साल 1992 में बिहार में अगड़ी जाति के लोगों की हत्या के मामले में चार लोग दोषी पाए गए थे। साल 2017 में इस मामले में नए साल के मौके पर इस मामले में फांसी की सजा प्राप्त कृष्णा मोची, नन्हे लाल मोची, वीर कुंवर पासवान और धर्मेंद्र सिंह की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील करने का फैसला लिया था।