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Prakash Karat: प्रकाश करात होंगे माकपा पोलित ब्यूरो-केंद्रीय समिति के अंतरिम समन्वयक; इसलिए संभालेंगे जिम्मा

Sun, 29 Sep 2024 02:12 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली

सार

माकपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल प्रकाश करात 2005 से 2015 तक इसके महासचिव रहे। वह 1985 में केंद्रीय समिति के लिए चुने गए और 1992 में पोलित ब्यूरो के सदस्य बने। पोलित ब्यूरो पार्टी का प्रमुख निर्णय लेने वाला अंग है।
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Prakash Karat - फोटो : ANI
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विस्तार
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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात अंतरिम व्यवस्था के तौर पर पार्टी के पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के समन्वयक होंगे। वे अगले साल अप्रैल में पार्टी का 24वां सम्मेलन होने तक यह जिम्मेदारी संभालेंगे। वाम दल ने रविवार को यह जानकारी दी। यह फैसला माकपा महासचिव सीताराम येचुरी का 12 सितंबर को निधन हो जाने के मद्देनजर लिया गया है।

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माकपा के बयान के मुताबिक, नई दिल्ली में जारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक में फैसला किया गया है कि कॉमरेड प्रकाश करात अप्रैल 2025 में मदुरै में 24वीं पार्टी कांग्रेस (सम्मेलन) होने तक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के समन्वयक होंगे। यह निर्णय माकपा के मौजूदा महासचिव कॉमरेड सीताराम येचुरी के दुखद और अचानक निधन के कारण लिया गया है।

माकपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल प्रकाश करात 2005 से 2015 तक इसके महासचिव रहे। वह 1985 में केंद्रीय समिति के लिए चुने गए और 1992 में पोलित ब्यूरो के सदस्य बने। पोलित ब्यूरो पार्टी का प्रमुख निर्णय लेने वाला अंग है।
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पार्टी के रुख में बदलाव की उम्मीद नहीं
हालांकि, इस फैसले के बाद भी पार्टी के रुख में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। सीताराम येचुरी के निधन के बाद शुक्रवार और शनिवार को हुई पोलित ब्यूरो की बैठक में करात के नाम पर सहमति बनी और रविवार को केंद्रीय समिति के समक्ष प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, कुछ नेताओं ने कहा कि विकल्प के रूप में एक युवा चेहरे को तलाशने की जरूरत है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि करात के पास पार्टी का नेतृत्व करने का अनुभव है और अप्रैल 2025 में होने वाले माकपा के अगले अधिवेशन की तैयारी भी करनी है।

गठबंधन के मुद्दे पर भी कई अटकलें
प्रकाश करात की नियुक्ति से पार्टी के रुख में संभावित बदलाव के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं, खासकर गठबंधन के मुद्दे पर, लेकिन एक नेता ने कहा कि उन्हें पार्टी के रुख में तत्काल कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है। नेता ने कहा कि माकपा और उसका संगठन सांप्रदायिकता और सरकारी कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। हम धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक ताकतों को एक साथ लाने के दृष्टिकोण पर काम कर रहे हैं। अगले साल पार्टी अधिवेशन में पार्टी के रुख पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। अभी महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां ‘इंडिया’ गठबंधन अच्छा प्रदर्शन करेगा, साथ ही झारखंड में भी चुनाव होना है। माकपा ने हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों में ‘इंडिया’ गठबंधन की पार्टियों के बीच गठबंधन के तहत एक-एक उम्मीदवार मैदान में उतारा है। साथ ही, वह महाराष्ट्र और झारखंड में भी कुछ सीट पर चुनाव लड़ने की उम्मीद कर रही है।

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