केरल में कुछ आईपीएस अधिकारियों और सीएमओ के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने वाले वामपंथी समर्थित विधायक पीवी अनवर खुद मुश्किलों में फंसते नजर आ रहे हैं। उनके खिलाफ राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के फोन कॉल अवैध रूप से टैप करने का मामला दर्ज किया गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता थॉमस के पीलियानिक्कल की शिकायत के बाद नीलांबुर विधायक के खिलाफ शनिवार को यहां करुकाचल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 192 के तहत दर्ज किया गया है। यह दंगा भड़काने के इरादे से दूसरों को भड़काने के कृत्य से जुड़ार है।
एफआईआर के मुताबिक, अनवर ने अवैध रूप से दूरसंचार प्रणाली में सेंध लगाई और राज्य में वरिष्ठ अधिकारियों के फोन टैप किए। इससे जनता की सुरक्षा खतरे में पड़ गई और मीडिया के जरिए गलत सूचना फैली। इसमें आगे कहा गया है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य जनता के बीच नफरत पैदा करना और भड़काना था।
अनवर ने हाल ही में एडीजीपी (कानून व्यवस्था) एमआर अजितकुमार और कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कई आरोप लगाए थे। उन्होंने अपने और पथानामथिट्टा एसपी सुजीत दास के बीच कथित फोन कॉल भी जारी की थी। बाद में सुजीत दास को अनवर के साथ कथित बातचीत के लिए सेवा से निलंबित कर दिया गया था, जिसमें कथित तौर पर पुलिस में आंतरिक मुद्दों का खुलासा हुआ था।
अनवर ने केरल के मुख्यमंत्री, माकपा पर फिर साधा निशाना
इस बीच अनवर ने राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पर फिर से निशाना साधा। उन्होंने अपने द्वारा लगाए आरोपों के संबंध में उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराए जाने की मांग की है। अनवर ने रविवार को नीलांबुर में एक बैठक के दौरान विजयन, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) एम. आर. अजीत कुमार और माकपा के एक जिला सचिव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अजीत कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के कारण उन्हें एलडीएफ से बाहर कर दिया गया है।
180 मामलों की फिर से जांच करने का आदेश देने की चुनौती दी थी
अनवर ने इससे पहले विजयन को सोने की तस्करी के लगभग 180 मामलों की फिर से जांच करने का आदेश देने की चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस विदेश से अवैध रूप से लाई गई कीमती धातु को जब्त करते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही है। नीलांबुर से विधायक ने बैठक ऐसे वक्त में बुलाई है, जब माकपा ने हाल में कहा था कि उसने विधायक के साथ संबंध तोड़ लिए हैं और उसने उन पर दक्षिणपंथ की राजनीतिक धुरी बनने का आरोप लगाया था।