डॉ. पंत ने कहा, ब्लैक एनर्जी एपीटी, इंडस्ट्राॅयर 2.0 जैसे साइबर हमले महज संकेत हैं। यह इशारा करते हैं कि दुनियाभर में बिजली क्षेत्र में साइबर सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता की जरूरत है। पूर्व में यूक्रेन, अमेरिका, डेनमार्क और भारत के बिजली नेटवर्क पर साइबर हमले की कोशिश की जा चुकी है।
साइबर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएसएआई) के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. राजेश पंत ने शुक्रवार को कहा कि बिजली या ऊर्जा क्षेत्र में साइबर सुरक्षा का एक मजबूत तंत्र स्थापित करना समय की मांग है। डॉ. पंत 'पावर सेक्टर साइबर सुरक्षा सम्मेलन-2023' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र किसी भी देश का महत्वपूर्ण ढांचा होता है, एक बार इसमें सेंध लग जाए तो सबकुछ ठप हो जाएगा। ब्लैक आउट की स्थिति पैदा हो जाएगी। तकनीक पर हमारी बढ़ती निर्भरता का मतलब है कि व्यक्तिगत, वित्तीय और राष्ट्रीय सुरक्षा लगातार खतरे में है। युद्ध के दौरान सभी देशों में विद्युत क्षेत्र साइबर हमले के लिए सबसे आकर्षक लक्ष्य होता है। रूस-यूक्रेन युद्ध इसका ताजा उदाहरण है।
ब्लैक एनर्जी एपीटी और इंडस्ट्राॅयर 2.0 आने वाले खतरे के संकेत
विज्ञापन
डॉ. पंत ने कहा, ब्लैक एनर्जी एपीटी, इंडस्ट्राॅयर 2.0 जैसे साइबर हमले महज संकेत हैं। यह इशारा करते हैं कि दुनियाभर में बिजली क्षेत्र में साइबर सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता की जरूरत है। पूर्व में यूक्रेन, अमेरिका, डेनमार्क और भारत के बिजली नेटवर्क पर साइबर हमले की कोशिश की जा चुकी है।