मुंबई में जारी लगातार मूसलधार बारिश के कारण शहर जलमग्न हो गया है। जल जमाव के कारण रेल सेवाएं बाधित हुई हैं, ट्रैफिक में घंटों लोग फंसे रहे और विमान सेवाओं में देरी हो रही है। स्थानीय प्रशासन ने स्कूल और कॉलेज बंद रखने की घोषणा की है। मौसम विभाग का कहना है कि अभी भारी बारिश थमने वाली नहीं है और शुक्रवार तक बादल ऐसे ही बरसते रहेंगे।
लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब मुंबईवासियों को बारिश के बाद जलभराव की समस्या से दो चार होना पड़ रहा हो। हर साल बारिश शुरू होते ही सड़कों पर पानी जमा होने लगता है। इसके बाद शहरवासियों को ट्रैफिक जाम से लेकर तमाम समस्याओं से जूझना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि वो कौन से कारण हैं जिसकी वजह से मुंबई को हर साल इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
हर साल बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) बड़ी धनराशि बारिश से निपटने के लिए जारी करता है। साल 2005 में आई बाढ़ के बाद 13 वर्षों में बीएमसी का बजट 359 फीसदी बढ़ चुका है, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं। अगर हम मुंबई महानगरपालिका के प्रबंधन और बजट की तुलना सिंगापुर से करें तो पता चलता है कि वहां और उसी की तरह अन्य देशों में कम बजट में भी ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त रखा जाता है।
भारत तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, सुपरपावर है, बावजूद इसके यहां की आर्थिक राजधानी मुंबई में कुछ घंटे तेज बारिश से ही जान पर बन आती है। ये वो शहर है जिसे शंघाई बनाने का सपना देखा जाता है। लेकिन मानसून की बारिश से जलमग्न होने वाले मुंबई की तस्वीर हर साल एक जैसी दिखाई देती है। पिछले 10 वर्षों के दौरान यहां कुछ नहीं बदला है। सड़कों पर भरा पानी, ट्रैफिक जाम, पानी में डूबे रेलवे ट्रैक मुंबई की बदसूरती को दुनिया के सामने बयां करते हैं।
पिछले एक दशक में बारिश से बीएमसी ने कोई सबक नहीं लिया है। मुंबई को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने के सपने संजोने वाले शहर मुंबई में बारिश के मौसम में मुसीबतों का समंदर सड़कों पर दिखाई देने लगता है। कुल मिलाकर बारिश की वजह से मुंबई में हर वर्ष आपातकाल आ जाता है। दरअसल तेज बारिश के बाद बनने वाली इस परेशानी की वजह मुंबई का खराब ड्रेनेज सिस्टम है। वर्ष 2016-17 में मुंबई के लोगों ने दो लाख 48 हजार करोड़ रुपये का टैक्स दिया, फिर भी मुंबई की बारिश से बचने के लिए उन्हें बीएमसी के उपायों से कोई राहत नहीं मिली।