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Poonch Attack: पुंछ हमले में इस्तेमाल 'स्टिकी बम' क्या है, आतंकी इसे नया हथियार क्यों बना रहे हैं?

Sat, 22 Apr 2023 09:13 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गुरुवार को पुंछ जिले के भाटादूड़ियां इलाके में सैन्य वाहन पर आतंकी हमले में पांच जवान शहीद हो गए। सेना के सूत्रों ने कहा है कि हमले में स्टिकी बम का इस्तेमाल किया गया था। 
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'स्टिकी बम' - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों ने एक बार फिर कायराना हमले को अंजाम दिया है। गुरुवार को पुंछ जिले में दहशतगर्दों के हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए। इस बीच, सेना के सूत्रों ने कहा है कि इस हमले में स्टिकी बम और स्टील बुलेट्स का इस्तेमाल किया गया था। यह कोई पहली बार नहीं है जब इस बम का इस्तेमाल हुआ हो, इससे पहले पिछले साल उधमपुर और कटरा में आतंकियों ने इसके जरिए दहशतगर्दी फैलाई थी।
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पुंछ में क्या हुआ है? आखिर क्या हैं स्टिकी बम जिनका हमले में इस्तेमाल हुआ? इसका इस्तेमाल क्यों बढ़ रहा है? भारत में इसका इस्तेमाल कब-कब हुआ? इसका इतिहास क्या है?
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पुंछ में आतंकी हमले के बाद सैन्य वाहन में लगी आग - फोटो : संवाद
पुंछ में क्या हुआ है?
गुरुवार को पुंछ जिले के भाटादूड़ियां इलाके में सैन्य वाहन पर आतंकी हमले में पांच जवान शहीद हो गए। आतंकियों के हमले से वाहन में आग लग गई। जवान आग में झुलस गए। एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए सैन्य अस्पताल भेजा गया।

पुंछ-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुरुवार दोपहर बाद तीन बजे के करीब सेना की 49 राष्ट्रीय राइफल (आरआर) का एक सैन्य वाहन रसद लेकर भिंबर गली से गांव संगयोट स्थित सैन्य मुख्यालय की तरफ जा रहा था। इस दौरान भाटादूड़ियां और तोता गली के बीच अचानक आतंकियों ने घने कोहरे व बारिश के बीच इस वाहन पर हमला कर दिया। हमले के लिए स्टिकी बम का इस्तेमाल हुआ।

स्टिकी बम - फोटो : SOCIAL MEDIA
क्या है स्टिकी बम?
पुंछ आतंकी हमले के बाद फिर चर्चा में आए स्टिकी बम आतंकियों का नया हथियार बनते जा रहे हैं। 'स्टिकी बम' एक तरह का चुंबकीय बम होता है जिसमें लगा चिपचिपा पदार्थ किसी भी वाहन में आसानी से चिपक जाता है। इम्पीरियल वॉर म्यूजियम के मुताबिक, यह एक गोलाकार ग्लास फ्लास्क होता है जिसमें नाइट्रो-ग्लिसरीन भरा होता है। इसमें बर्डलाइम का एक मजबूत चिपकने वाला पदार्थ होता है।  

इसे दूर से ही नियंत्रित किया जा सकता है। आतंकी इस बम को टाइमर द्वारा भी सेट करते हैं। स्टिकी बम में, रिमोट कंट्रोल बम के विपरीत, लगभग 5-10 मिनट का टाइमर होता है। यह हमलावर को भागने के लिए पर्याप्त समय देता है।

इसका इस्तेमाल क्यों बढ़ रहा?
बम सस्ता होता है। इसकी पोर्टेबिलिटी और बनाने की कम लगात के कारण यह आतंकवादियों का नया हथियार बनता जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इसे सीमा पार से आने वाला एक नया खतरा माना जा रहा है।

आतंकी हमला - फोटो : SOCIAL MEDIA
भारत में इसका इस्तेमाल कब-कब हुआ?
भारत में विशेषकर जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ समय में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां आतंकवादियों ने वाहनों पर स्टिकी बमों का इस्तेमाल किया है। ताजा मामला जम्मू-कश्मीर के पूंछे जिले का है, सेना के ट्रक में एक स्टिकी बम लगा हुआ था। पिछले साल सितंबर में उधमपुर में हुए बस हमले में और मई में हुए कटरा बम धमाके में भी ये बम इस्तेमाल किए गए थे।

2022 में ही अप्रैल में जम्मू के बाहरी इलाके के पास सिधरा बाईपास पर यह बम पाया गया था। वहीं, अगस्त 2021 में सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ में एक शख्स के पास से स्टिकी बम जब्त किए थे। फरवरी 2012 में इसे सांबा में पाया गया था। फरवरी 2012 में नई दिल्ली में इस्राइली दूतावास के बाहर हुए हमले में भी इसी बम का इस्तेमाल किया गया था।

Afghanistan (file)
और इसका इस्तेमाल कहां हुआ है?
इन स्टिकी बमों का व्यापक इस्तेमाल युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में भी देखने को मिला। यहां पिछले साल तालिबान के अधिग्रहण से पहले अमेरिकी सेना के खिलाफ इन बमों का इस्तेमाल हो रहा था। सीरिया में भी आतंकी इसका इस्तेमाल करते रहे हैं।
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द्वितीय विश्व युद्ध - फोटो : Social media
इसका इतिहास क्या है?
ब्रिटिश सेना ने एंटी-टैंक हैंड ग्रेनेड यानी स्टिकी बम' को द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में डिजाइन किया गया था, जब ब्रिटेन के पास जर्मन बख्तरबंद वाहनों का मुकाबला करने के लिए कोई प्रभावी एंटी-टैंक हथियार नहीं थे। 1941 में होम गार्ड और सेना दोनों को इस तरह के बम मुहैया कराए गए थे। हालांकि, जनवरी 1946 में इन्हें अप्रचलित घोषित कर दिया गया था।
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