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प्रशांत किशोर: भाजपा से दूर हो कर भी ‘बदले-बदले से हुजूर नजर आते हैं’, कई मौके पर कर चुके हैं पीएम मोदी की तारीफ

प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 28 Oct 2021 06:46 PM IST

सार

चुनावी रणनीतिकार के रूप में प्रशांत किशोर के लिए 2021 उनके अब तक के करियर के सबसे महत्वपूर्ण सालों में से एक हो सकता है। इसी साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हुए हैं और किशोर ने वहां भाजपा को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के रणनीतिकार के तौर पर उन्होंने शानदार पारी खेली और नरेंद्र मोदी को प्रचंड जीत दिलाने का श्रेय उन्हें भी दिया गया। लेकिन क्या पीके असल में कांग्रेस को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं... 
 
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पीएम मोदी के साथ प्रशांत किशोर - फोटो : PTI
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पीएम मोदी के संदर्भ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए एक बड़ी बात कही है। प्रशांत किशोर यानी पीके ने कहा जब तक आप उनकी (मोदी की) ताकत को नहीं समझेंगे आप उन्हें हरा नहीं पाएंगे। आपको यह समझना होगा कि उनकी लोकप्रियता की क्या वजह है। अगर आप इस बात को समझ लेंगे, तभी आप उन्हें हराने के तरीके  ढूंढ सकते हैं।

पीके ने कहा वह (राहुल गांधी) शायद इस भ्रम में हैं कि मोदी के सत्ता में रहने तक ही भाजपा मजबूत है। उन्हें लगता है कि यह बस समय की बात है जब लोग उन्हें (नरेंद्र मोदी) सत्ता से बाहर कर देंगे। पीके ने यह बातें अपनी  गोवा यात्रा के दौरान कही है। उन्होंने कहा जैसे कांग्रेस 40 सालों तक भारतीय राजनीति के केंद्र में रही है, वैसे ही भारतीय जनता पार्टी भी आने वाले दशकों तक भारतीय राजनीति में एक बड़ी ताकत बनी रहेगी। 


प्रशांत किशोर बेशक 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा से दूर हों और दूसरी पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करते हों लेकिन राजनीति के जानकारों का कहना है कि ऐसा लगता है कि प्रशांत किशोर भाजपा से दूर होकर भी दूर नहीं है और वे अक्सर मोदी की तारीफ का कोई भी मौका अपने हाथ से जाने नहीं देते हैं। इस बहाने से वे भाजपा से अपनी नजदीकी बनाए रखने की कोशिश करते हैं। 

जानकारों का मानना है कि यह किशोर की रणनीति हो सकती है क्योंकि उनकी नजर 2024 के लोकसभा चुनावों पर है और इसी की आड़ में वे सभी दलों को सब्जबाग दिखा रहे हैं। एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक पीके किधर हैं उस बारे में कुछ भी कहना आसान नहीं, लेकिन इतना तो तय है कि वे सोच-समझ कर सभी पार्टियों को एक झुनझुना थमाए रखते हैं। 
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पीएम मोदी के साथ प्रशांत किशोर - फोटो : PTI
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पीएम मोदी के संदर्भ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए एक बड़ी बात कही है। प्रशांत किशोर यानी पीके ने कहा जब तक आप उनकी (मोदी की) ताकत को नहीं समझेंगे आप उन्हें हरा नहीं पाएंगे। आपको यह समझना होगा कि उनकी लोकप्रियता की क्या वजह है। अगर आप इस बात को समझ लेंगे, तभी आप उन्हें हराने के तरीके  ढूंढ सकते हैं।

पीके ने कहा वह (राहुल गांधी) शायद इस भ्रम में हैं कि मोदी के सत्ता में रहने तक ही भाजपा मजबूत है। उन्हें लगता है कि यह बस समय की बात है जब लोग उन्हें (नरेंद्र मोदी) सत्ता से बाहर कर देंगे। पीके ने यह बातें अपनी  गोवा यात्रा के दौरान कही है। उन्होंने कहा जैसे कांग्रेस 40 सालों तक भारतीय राजनीति के केंद्र में रही है, वैसे ही भारतीय जनता पार्टी भी आने वाले दशकों तक भारतीय राजनीति में एक बड़ी ताकत बनी रहेगी। 

प्रशांत किशोर बेशक 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा से दूर हों और दूसरी पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करते हों लेकिन राजनीति के जानकारों का कहना है कि ऐसा लगता है कि प्रशांत किशोर भाजपा से दूर होकर भी दूर नहीं है और वे अक्सर मोदी की तारीफ का कोई भी मौका अपने हाथ से जाने नहीं देते हैं। इस बहाने से वे भाजपा से अपनी नजदीकी बनाए रखने की कोशिश करते हैं। 

जानकारों का मानना है कि यह किशोर की रणनीति हो सकती है क्योंकि उनकी नजर 2024 के लोकसभा चुनावों पर है और इसी की आड़ में वे सभी दलों को सब्जबाग दिखा रहे हैं। एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक पीके किधर हैं उस बारे में कुछ भी कहना आसान नहीं, लेकिन इतना तो तय है कि वे सोच-समझ कर सभी पार्टियों को एक झुनझुना थमाए रखते हैं। 

नीतीश कुमार-प्रशांत किशोर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
2014 में भाजपा से राह अलग हो गई
भारतीय राजनीति में चुनावी रणनीति को एक पेशेवर रूप देने वाले प्रशांत किशोर ने कई राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाई है। ज्यादतर चुनावों में उन्हें कामयाबी हासिल हुई जबकि कुछ में असफलता भी हाथ लगी। 2014 का साल उनके लिए ऐतिहासिक रहा जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने और पीके ने इस चुनाव अभियान की कमान संभाली।

लोकसभा चुनाव में चाय पे चर्चा जैसे उनके कई चुनावी अभियान ने खासी लोकप्रियता हासिल की और नरेंद्र मोदी की जीत में उनकी चुनावी रणनीति को भी श्रेय दिया गया। लेकिन 2014 के बाद भाजपा से उनकी राह अलग हो गई। उसके बाद वे अलग-अलग पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम करने लगे, लेकिन जब भी मौका मिला, भाजपा या पीएम मोदी की तारीफ करने से नहीं चूके।

उदाहरण के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कहा कि वह एक साल से अधिक समय से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के संपर्क में है और यदि वे 2019 में उनके लिए चुनाव अभियान चलाना चाहें तो पीएम उनका “स्वागत” करेंगे। इसी तरह 2019 में जब किशोर ने ममता बनर्जी के सलाहकार के तौर पर काम करना शुरू कर दिया तब अमेरिका में ‘हाऊडी मोदी’ कार्यक्रम तब के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ करने पर इसे स्मार्ट कदम बताते हुए पीएम मोदी की तारीफ की थी।



 

ममता बनर्जी-प्रशांत किशोर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
पीएम को बंगाल में भी लोकप्रिय बताया था
इसी साल पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले क्लबहाऊस ऑडियो चैट में भी प्रशांत किशोर को पीएम मोदी की तारीफ करते सुना गया। उन्होंने कहा था कि इसमें कोई शक नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में लोकप्रिय हैं और कुछ लोगों को तो यहां तक लगता है कि वह भगवान हैं। उन्होंने आगे कहा था भाजपा या केंद्र सरकार के खिलाफ कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं है लेकिन सत्ताधारी राज्य सरकार के लिए कुछ विरोध है। किशोर आगे कहते हैं कि टीएमसी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भाजपा के लिए दरवाजे खोल रही है और बंगाल चुनाव में पीएम मोदी की लोकप्रियता भी एक बड़ा कारक है।

खुद भ्रम का शिकार
वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष कहते हैं प्रशांत किशोर को अपने आप में यह बड़ा भ्रम है सारी राजनीति वे ही जानते हैं इसलिए वे राजनीतिक पार्टियों और लोगों को भ्रम में रखने की कोशिश करते हैं। दरअसल उन्हें अनावश्यक रूप से ज्यादा भाव दिया जाता है और ऐसे प्रचारित किया जाता है कि मानो वे देश के बड़े चाणक्य हैं। लेकिन प्रशांत किशोर को इस बात का जवाब देना चाहिए कि क्या वे बीच-बीच में राहुल विरोधी बयान इसलिए देते रहते हैं कि उन्होंने कांग्रेस जो फॉर्मूला दिया था, उसे पार्टी ने नहीं माना है।

उनका कहना है कि किशोर को अपनी विचारधारा स्पष्ट करनी चाहिए क्योंकि जब वे मोदी के साथ जाते हैं तो वे उन्हें मसीहा बताते हैं कि और जब लगता है कि वे अभी जिस पार्टी के लिए चुनावी रणनीति बना रहे हैं उसके फायदे के लिए पीएम मोदी का विरोध करना जरूरी है तो उन्हें खतरा बता देते हैं। ऐसा लगता है कि वे खुद कंफ्यूजन में है।


 

शरद पवार और प्रशांत किशोर। - फोटो : Amar Ujala
विपक्ष को डराते हैं पीके
वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त कहते हैं प्रशांत किशोर बहुत महत्वाकांक्षी है। पहले मोदी के साथ गए। फिर बिहार में नीतीश कुमार से मिल गए। कभी अरविंद केजरीवाल तो कभी पंजाब में अमरिंदर सिंह के साथ चले गए।आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी से हाथ मिलाया और बंगाल में ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीति बनाने लगे। लेकिन अब वे लोगों को उलझाने लगे हैं और विचाराधार का घालमेल करने लगे हैं। एक तरफ लगता है कि वे तृणमूल कांग्रेस के लिए माहौल बना रहे हैं, दूसरी तरफ उनके कांग्रेस में शामिल होने के खबरें मीडिया में उछलने लगती है। बीच-बीच में वे भाजपा और पीएम मोदी के नाम पर विपक्ष को डराते हैं।  वे रहस्य बने हुए हैं और यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि राहुल गांधी को सामने रखकर विपक्ष मजबूत से खड़ा नहीं हो सकता। 

चुनाव बिजनेस नहीं
वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष की राय में प्रशांत किशोर राजनेता नहीं है, बल्कि चुनाव उनके लिए एक बिजनेस है। वे कहते हैं कि यदि पीके को लगता है कि दूसरी विपक्षी पार्टियां कुछ कर ही नहीं सकती तो वे उन्हें खुद अपनी  पार्टी खुद बना लेनी चाहिए। खुद जमीन पर उतरना और चुनाव लड़ना चाहिए। क्यों उन्होंने बिहार में एक संगठन बनाया और भाग खड़े हुए?
 

पटना में प्रशांत किशोर फाइल फोटो - फोटो : PTI
कांग्रेस को कमजोर के लिए काम कर रहे पीके?
दूसरी तरफ कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि प्रशांत किशोर राहुल गांधी के लिए जिस भ्रम की बात कर रहे हैं उस भ्रम का शिकार वे खुद ही हो रहे हैं, क्योंकि भाजपा उन्हें अब कोई भाव नहीं दे रही और राहुल गांधी के साथ उनकी बात नहीं बनी। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा- जब कांग्रेस में बात नहीं बन पा रही है तो वे फिर भाजपा के करीब जाने की जुगाड़ में है।

वरिष्ठ नेता ने कहा सब जानते हैं कि वे कांग्रेस को कमजोर करने में लगे हैं और अभी मौका देखकर तृणमूल कांग्रेस को मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर उभारने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वे कांग्रेस के साथ लुकाछुपी का खेल खेलते रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं के टीएमसी में शामिल होने के पीछे किसकी सोच है? वे कहने को भाजपा से दूर हैं लेकिन असल में सारे बयान भाजपा को ध्यान में रखकर ही देते हैं। पीके उनकी (भाजपा) की ताकत का बार-बार जिक्र करके देश की सबसे पुरानी पार्टी के महत्व को नकारने की कोशिश कर रहे हैं, टीएमसी भी यह बात जल्दी समझ जाए तो अच्छा हो।  हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कांग्रेस को लेकर प्रशांत किशोर की टिप्पणियों और सुझावों को लेकर तीखा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि पहले वे पार्टी में शामिल हों तब सुझाव दें। 

 
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