प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को मकर संक्रांति पर सूर्य की महिमा का बखान करते हुए अपनी मातृभाषा गुजराती में एक कविता लिखी और ट्विटर पर साझा की। इस कविता में मोदी ने सूर्य को रूपक बताते हुए संदेश दिया कि आज का दिन एक अथक प्रेमी के सम्मान का दिन है जो सभी के कल्याण के लिनए बिना अवकाश के लिए निरंतर यात्रा करता है।
पीएम मोदी ने इसके बाद एक और ट्वीट किया, आज सुबह मैंने गुजराती में एक कविता साझा की थी। कुछ साथियों ने इसका हिंदी में अनुवाद कर मुझे भेजा है। उसे भी मैं साझा कर रहा हूं। मोदी ने कहा, हालांकि अभी दुनिया के लोग कोरोना की समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन फिर भी नए साल को लेकर लोगों में उम्मीदें हैं।
पीएम मोदी की गुजराती कविता का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है-
अंबर से अवसर
और
आंख में अंबर
सूरज का ताम समेटे...अंबर
चांदनी की शीतलता बिखेरे...अंबर
सम-विषम समाए...अंबर में
भेद-विभेद संग विवेक विशेष
जगमग तारे अंबर उपवन में
विराट की कोख में...अवसर की आस में
टिमटिमाते तारे तपते सूरज में
नीची उड़ान करे परेशान
ऊंची उड़ान साधे आसमान
हो कंकड़ या संकट
पत्थर हो या पतझड़
वसंत में...भी संत
विनाश में...है आस
समनों का अंबर
अंबर सी आस
गगन...विशाल
जगे विराट की आस
मार्ग...तप का
मर्म...आशा का
अविरत...अविराम
कल्याण यात्री...सूर्य
आज
तपते सूरज को, तर्पण का पल
शत शत नमन...शत शत नमन
सूरज देव को अनेक नमन।
- नरेंद मोदी