पिछले अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है कि राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव और मंत्रियों का कामकाज ही इसका रोडमैप तय करेगा। प्रधानमंत्री तीन-चार मंत्रियों के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। वह नॉन परफार्मिंग मंत्रियों की केंद्रीय मंत्रिपरिषद से छुट्टी कर सकते हैं। करीब एक दर्जन नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश और गुजरात को खास प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
इसके साथ ही माना जा रहा है कि अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की नजर में सभी राज्य बराबर हैं, लेकिन गुजरात और उत्तर प्रदेश में भाजपा और राज्य सरकार की स्थिति को लेकर वह थोड़े संवेदनशील दिख रहे हैं। उत्तर प्रदेश की तरह ही गुजरात में भी पार्टी, संगठन व सरकार में नई ऊर्जा भरने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी अरुण जेटली के निधन के बाद से बड़ा खालीपन महसूस कर रहे हैं। हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री की केमिस्ट्री बहुत अच्छी रहती है, लेकिन सरकार के कामकाज को चलाने तथा सलाह के लिए वरिष्ठ सहयोगियों की आवश्यकता पड़ती है।
बताते हैं कि राजनीतिक परिपक्वता के लिहाज से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निर्भरता धीरे-धीरे बढ़ रही है। ऐसा माना जा रहा है कि हाल में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में इसके बाबत स्पष्ट संकेत देखने को मिल सकता है।