प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से फोन पर बात कर अल अहली अस्पताल में नागरिकों की मौत पर संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत फलस्तीन को मानवीय मदद भेजना जारी रखेगा।
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि इस्राइल-हमास के बीच जंग में भारत की नीति स्पष्ट है। हम आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा करते हैं। हमने इस्राइल पर भयानक आतंकी हमले की निंदा की, तो संघर्ष के बीच गाजा में सामान्य लोगों को निशाना बनाए जाने की भी निंदा की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि फलस्तीन पर भारत के रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है। फलस्तीन मसले पर हम दो राष्ट्र के सिद्धांत को मानते हैं और स्वतंत्र व संप्रभु फलस्तीन के गठन के लिए सीधी वार्ता के पक्षधर हैं। हम चाहते हैं कि फलस्तीन के साथ इस्राइल के अधिकारों की भी रक्षा हो।
उन्होंने कहा कि संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का सख्ती से पालन होना चाहिए। भारत ने 2000 से 2023 तक फलस्तीन को लगातार मानवीय मदद दी है। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के जरिये करीब 2.95 करोड़ डॉलर की मदद भारत की तरफ से की जा चुकी है। बागची ने कहा कि गाजा में चार तो वेस्ट बैंक में 12 से 13 भारतीय फंसे हैं। संघर्ष के कारण यहां से भारतीयों को निकालना बेहद मुश्किल है। हम इसके लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
पीएम ने जताई संवेदना
पीएम मोदी ने फलस्तीन के राष्ट्रपति से बातचीत की जानकारी एक्स पर दी। उन्होंने लिखा, फलस्तीनी प्राधिकरण के प्रमुख महमूद अब्बास से बात की। गाजा के अस्पताल में नागरिकों की मौत पर संवेदना व्यक्त की। भारत फलस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता भेजना जारी रखेगा। क्षेत्र में आतंकवाद, हिंसा और बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता साझा की।
सात अक्तूबर हमास ने बोला था हमला
इससे पहले सात अक्तूबर को गाजा पट्टी से आतंकी समूह हमास द्वारा इस्राइल पर पांच हजार रॉकेट दागे गए थे। इसके बाद से दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस्राइल और हमास के बीच भीषण युद्ध जारी है। भारत ने इस आतंकी हरकत की कड़ी निंदा की थी।
अल-अहली अरब अस्पताल पर बमबारी में गई थी 500 जानें
इस्राइल-हमास युद्ध के बीच 17 अक्तूबर को गाजा पट्टी में अल-अहली अरब अस्पताल पर बमबारी की गई थी। हमले के आरोप इस्राइली सेना पर लगाए गए थे, जिसे इस्राइल ने सिरे से खारिज कर दिया था। बाद में यह भी दावा किया गया कि हमले की वजह फलस्तीन इस्लामिक जिहाद की मिसाइल का मिसफायर होना बताया गया। इसमें कम से कम 500 लोगों की मौत हुई थी।
10 अक्तूबर को नेतन्याहू से फोन पर की थी बात
तनाव भरी स्थिति के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और नरेंद्र मोदी के बीच 10 अक्तूबर को फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हमले की वर्तमान स्थिति पर खुलकर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को आश्वासन दिया था कि भारत इस कठिन समय में इस्राइल के साथ खड़ा है।
नेतन्याहू से बात पीएम मोदी ने क्या कहा था?
नेतन्याहू से बात के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू को उनके फोन कॉल और मौजूदा स्थिति पर अपडेट प्रदान करने के लिए धन्यवाद देता हूं। भारत के लोग इस मुश्किल समय में इजरायल के साथ मजबूती से खड़े हैं।
आतंकी हमले की निंदा की थी
पीएम मोदी ने आतंकवाद पर भी जमकर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि भारत दृढ़ता से आतंकवाद के हर रुप की निंदा करता है। इस हमले में मारे गए निर्दोष पीड़ित और उनके परिवार के लिए प्रार्थना करते हैं।