नए संसद भवन में राज्यसभा में अपने पहले संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 'नया संसद भवन मात्र एक नई इमारत नहीं है बल्कि यह एक नई शुरुआत का प्रतीक भी है। अमृतकाल की शुरुआत में ही इस भवन का निर्माण और यहां हम सबका प्रवेश अपने आप में देश के 140 करोड़ नागरिकों की आशा, आकांक्षाओं में नई ऊर्जा और नया विश्वास पैदा करेगा।'
नया संसद भवन ऐतिहासिक फैसले का साक्षी बन रहा
प्रधानमंत्री ने कहा कि 'हमारे संविधान में राज्यसभा को उच्च सदन बताया गया है। हमारे संविधान निर्माता चाहते थे कि यह सदन राजनीति से ऊपर उठकर गंभीर और वैचारिक चर्चा का केंद्र बने। आज नया संसद भवन देश के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक फैसले का साक्षी बन रहा है। अभी लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया, जो चर्चा के बाद यहां भी आएगा। यह नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। जब हम जीवन की गुणवत्ता की बात करते हैं तो उसकी पहली हकदार हमारी महिलाएं होती हैं। अनेक नए-नए क्षेत्र हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
महिलाओं के नेतृत्व में हो रहा विकास
प्रधानमंत्री ने कहा, 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं है। इससे समाज में बेटियों का सम्मान बढ़ा है। वित्त समेत विभिन्न क्षेत्रों में भी भारत की महिलाओं का सामर्थ्य नजर आ रहा है। परिवार के साथ ही राष्ट्र के जीवन में भी महिलाओं की अहमियत प्रदर्शित हो रही है। महिलाओं के सम्मान के लिए तीन तलाक का कानून बनाया गया। महिलाओं के नेतृत्व में हो रहा विकास चर्चा का विषय है। यह हम सब के लिए गर्व का विषय है।
'सर्वसम्मति से हो फैसला'
पीएम मोदी ने कहा कि 'नया विधेयक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का विधेयक है, जो लंबे समय से लंबित चल रहा था। लेकिन जब नए सदन में आए हैं तो मुझे विश्वास है कि यह लंबे समय से लंबित विषय कानून बनकर हमारे देश की विकास यात्रा में नारी शक्ति की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पेश किया गया है। जिस पर कल लोकसभा में चर्चा होगी। मेरा आग्रह है कि इस विधेयक पर सर्वसम्मति से फैसला हो।'