समग्र स्वास्थ्य सेवा मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से ऐसे कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) का विकास करना है, जो विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की योजनाओं से छूट गए हैं। केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने जानकारी देते हुए कहा कि इस अत्यंत महत्वपूर्ण मिशन पर करीब 24 हजार करोड़ रुपये व्यय होगा।
इसके अलावा आदिवासी इलाकों में बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र ने 70 वर्षों की तुलना में नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले नौ वर्षों में अधिक उपलब्धियां हासिल की हैं। देश में 'स्वस्थ राष्ट्र, समृद्ध राष्ट्र' की एक व्यापक भावना बनी है।
एम्स की संख्या 6 से बढ़कर 23
मुंडा ने बताया कि आदिवासी स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की है। देश में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) की संख्या 6 से बढ़कर 23 हो गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य उपचार केंद्रों की संख्या बढ़कर 1.63 लाख हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारदर्शी और दूरदर्शी कुशल नेतृत्व में समग्र स्वास्थ्य सेवाएं सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार है।
कोई भी छूटने न पाए की भावना से हो रहा काम
मुंडा ने कहा, कोई भी छूटने न पाए की भावना के साथ 23 सितंबर 2018 को झारखंड के रांची से एक योजना की शुरुआत की गई है। यह लगभग 55 करोड़ लाभार्थियों को लक्षित करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम है। इसमें पात्र लोगों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान करने का प्रावधान है।
गिनाईं 9 साल में स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियां
- देश के प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज के लक्ष्य में पिछले 9 सालों में इनकी संख्या 350 से बढ़कर 700 से ज्यादा हो गई है।
- एमबीबीएस सीटों की संख्या 52 हजार से 1.8 लाख से ज्यादा हुईं।
- पीजी की सीटे 32 हजार से बढ़ाकर 70 हजार से अधिक हो गई है।
- देश में 10 हजार से ज्यादा जन औषधि स्टोर खोले गए और अब इनकी संख्या को 10 हजार से बढ़ाकर 25 हजार किया जा रहा।
- जन औषधि योजना के माध्यम से गरीबों को अभी तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो गई है।