डीजल की कीमत कई राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में 100 रुपये प्रति लीटर से पार पहुंच चुकी है। इनमें मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, केरल, कर्नाटक और लद्दाख शामिल हैं। राज्यों के क्षेत्रीय करों में अंतर की वजह से कीमतों में मामूली फर्क होता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि
एक महीने पहले अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क कहे जाने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 73.91 डॉलर प्रति बैरल थी, जो आज 84.8 डॉलर प्रति बैरल है। यह पिछले 7 साल में सबसे अधिक कीमत है। भारत इनके आयात पर निर्भर है। ऐसे में मूल्य की अंतरराष्ट्रीय वृद्धि हमें सीधे प्रभावित करती है।
टैक्स नहीं बढ़ते तो पेट्रोल 75, डीजल 60 का मिलता
पेट्रोल-डीजल की महंगाई के पीछे केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाए टैक्स सबसे बड़ी वजह हैं। यह दोनों उत्पाद सरकार की आय का प्रमुख स्रोत बन चुके हैं।
पेट्रोल
2014 में तेल कंपनियां डीलरों को 49 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल बेच रही थी। इनमें केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स और डीलरों का मार्जिन मिलाने पर कीमत 74 रुपये प्रति लीटर पहुंचती थी। उस समय केंद्र 14 प्रतिशत टैक्स लेता था, आज 32 प्रतिशत ले रहा है। राज्य सरकारें भी 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 23 प्रतिशत टैक्स ले रही हैं। टैक्स की 2014 की दरें ही बरकरार रहें तो पेट्रोल 70 से 75 रुपये प्रति लीटर में मिल सकता है।
डीजल का हाल
डीजल पर 2014 में केंद्र का टैक्स 8 फीसदी था जो आज 35 फीसदी है। राज्यों का टैक्स 12 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी हो गया है। यह भी अगर 2014 के स्तर पर रहे तो डीजल 55 से 60 रुपये प्रति लीटर में मिल सकता है।