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पेट्रोल-डीजल पर इतना टैक्स क्यों?: हरदीप पुरी बोले- इसी से चलती हैं देश में कल्याणकारी योजनाएं  

Sat, 23 Oct 2021 09:05 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टैक्स में कटौती की मांग पर उन्होंने कहा कि मैं वित्त मंत्री नहीं हूं, इसलिए पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने को लेकर जवाब नहीं दे सकता। 
 
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हरदीप सिंह पुरी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर लोग परेशान हैं इनके दाम 100 रूपये प्रति लीटर से ऊपर जा चुके हैं। आए दिन इसके दाम नई ऊंचाई पर पहुंचने के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि इससे मिलने वाले टैक्स से ही सरकारी योजनाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि इसी की बदौलत सरकार न सिर्फ सभी को मुफ्त कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करवा सकी बल्कि गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न भी देने में सफल रही। महामारी के दौरान उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को मुफ्त सिलेंडर री-फिलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई। उन्होंने यह भी कहा कि तेल की घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से निर्धारित होती हैं।

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टैक्स में कटौती पर दिया ये जवाब 
जब उनसे मीडिया ने पूछा कि सरकार उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए टैक्स में कटौती करेगी या नहीं। पुरी ने जवाब दिया, भारत में जब भी पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ते हैं तो मीडिया तुरंत पूछने लगती है कि आखिर सरकार अपने टैक्स क्यों नहीं घटा रही है। कीमत बढ़ने की कोई भी वजह हो, लेकिन सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह टैक्स घटाकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारे। 

कहा- मैं वित्त मंत्री नहीं 
फिलहाल सरकार पेट्रोल की कीमत का 54 प्रतिशत और डीजल की कीमत का 48 प्रतिशत बतौर टैक्स वसूल रही है। पुरी ने कहा कि टैक्स से मिले रुपयों का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण, गरीबों के लिए घर बनाने और कई सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जाता है। एक्साइज टैक्स के तौर पर हम प्रति लीटर जो 32 रुपये वसूलते हैं, उससे सभी तरह की कल्याणकारी योजनाएं चलाई जाती हैं। टैक्स में कटौती की मांग पर उन्होंने कहा कि मैं वित्त मंत्री नहीं हूं, इसलिए पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने को लेकर जवाब नहीं दे सकता। 
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हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अगर सरकारी और निजी रिफाइनरी मिलकर तेल खरीदें तो आयात बिल को घटाया जा सकता है। पुरी ने कहा कि इस संबंध में उनके मंत्रालय ने दोनों तरह की रिफाइनरियों की एक बैठक बुलाई थी। बैठक के नतीजे बहुत ही उत्साहनजक रहे। 

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