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घुलता जहरः फलों, सब्जियों और खाद्य पदार्थों के जरिये शरीर में पहुंच रहे कीटनाशक

मनीष मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 14 Aug 2020 04:18 AM IST

सार

  • तय मात्रा से अधिक और बार-बार कीटनाशकों का छिड़काव खाने को बना रहा जहरीला
  • सबसे अधिक सब्जी व दूध से शरीर में पहुंचते हैं घातक कीटनाशक
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सब्जियां (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खाने के साथ ही हमारे शरीर में बड़ी मात्रा में कीटनाशक भी पहुंच रहे हैं। जो धीरे-धीरे जमा होकर शरीर में घातक बीमारियों का कारण बनते हैं। शरीर में सबसे अधिक कीटनाशक सब्जियों और दूध के जरिये पहुंच रहे हैं। दरअसल, कीटनाशक चारे के जरिये जानवरों तक पहुंचता है और यह वसा में ज्यादा इकट्ठा होता है।

विशेषज्ञ कहते हैं किसान फसलों में अधिक कीटनाशक का छिड़काव कर रहे हैं तो उसके अवशेष अनाज, फल, सब्जी और अन्य माध्यमों से मानव शरीर में इकट्ठा हो रहे हैं। सबसे अधिक खतरनाक कीटनाशक सब्जियों के माध्यम से शरीर में पहुंच रहे हैं। खेत से सब्जी बाजार से उपभोक्ता तक पहुंचती है।



भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट विभाग की वैज्ञानिक डॉ. सुमिता अरोड़ा खाद्य पदार्थों में अवशेष मिलने के लिए किसानों को ही दोषी मानती हैं। डॉ. अरोड़ा कहती हैं, हर कीटनाशक को डालने का समय होता है, उसके बाद निर्धारित समय तक प्रतीक्षा के बाद ही किसान को फसल काटनी चाहिए। किसान क्या करते हैं कि पकी फसल पर भी डाल देते हैं। अनाज से अधिक फल और सब्जियों में डाला जाने वाला कीटनाशक खतरनाक होता है।

2017-18 : जांच में दौरान 19 फीसदी में कीटनाशक
वर्ष 2017-18 में देश भर से 27 प्रयोगशालाओं में सब्जियों, फलों, मसाले, चावल, गेहूं, दालें, दूध, मछलियां, मांस आदि के 23,660 नमूनों की जांच में 4510 (19.1 फीसदी) में कीटनाशकों के अंश पाए गए।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा...
हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. जीवी रामाजुनेयलू आंध्र-तेलंगाना में कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से बचाने और प्राकृतिक खेती के लिए दशकों से काम कर रहे हैं।

कई तरह के कैंसर का कारक
कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से बच्चों में कैंसर होने की संभावना काफी रहती है। अगर गर्भावस्था से पहले भी माता-पिता कीटनाशकों की चपेट में आते हैं तो तब भी बच्चे में कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में भारत में कैंसर के कुल 11,57,294 मामले सामने आए, इनमें से 7,84,821 लोगों की मौत हो गई। इस तरह से भारत में प्रतिदिन कैंसर से 2,150 लोग दम तोड़ देते हैं।

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सब्जियां (प्रतीकात्मक तस्वीर)
खाने के साथ ही हमारे शरीर में बड़ी मात्रा में कीटनाशक भी पहुंच रहे हैं। जो धीरे-धीरे जमा होकर शरीर में घातक बीमारियों का कारण बनते हैं। शरीर में सबसे अधिक कीटनाशक सब्जियों और दूध के जरिये पहुंच रहे हैं। दरअसल, कीटनाशक चारे के जरिये जानवरों तक पहुंचता है और यह वसा में ज्यादा इकट्ठा होता है।

विशेषज्ञ कहते हैं किसान फसलों में अधिक कीटनाशक का छिड़काव कर रहे हैं तो उसके अवशेष अनाज, फल, सब्जी और अन्य माध्यमों से मानव शरीर में इकट्ठा हो रहे हैं। सबसे अधिक खतरनाक कीटनाशक सब्जियों के माध्यम से शरीर में पहुंच रहे हैं। खेत से सब्जी बाजार से उपभोक्ता तक पहुंचती है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट विभाग की वैज्ञानिक डॉ. सुमिता अरोड़ा खाद्य पदार्थों में अवशेष मिलने के लिए किसानों को ही दोषी मानती हैं। डॉ. अरोड़ा कहती हैं, हर कीटनाशक को डालने का समय होता है, उसके बाद निर्धारित समय तक प्रतीक्षा के बाद ही किसान को फसल काटनी चाहिए। किसान क्या करते हैं कि पकी फसल पर भी डाल देते हैं। अनाज से अधिक फल और सब्जियों में डाला जाने वाला कीटनाशक खतरनाक होता है।

2017-18 : जांच में दौरान 19 फीसदी में कीटनाशक
वर्ष 2017-18 में देश भर से 27 प्रयोगशालाओं में सब्जियों, फलों, मसाले, चावल, गेहूं, दालें, दूध, मछलियां, मांस आदि के 23,660 नमूनों की जांच में 4510 (19.1 फीसदी) में कीटनाशकों के अंश पाए गए।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा...
हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. जीवी रामाजुनेयलू आंध्र-तेलंगाना में कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से बचाने और प्राकृतिक खेती के लिए दशकों से काम कर रहे हैं।

कई तरह के कैंसर का कारक
कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से बच्चों में कैंसर होने की संभावना काफी रहती है। अगर गर्भावस्था से पहले भी माता-पिता कीटनाशकों की चपेट में आते हैं तो तब भी बच्चे में कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में भारत में कैंसर के कुल 11,57,294 मामले सामने आए, इनमें से 7,84,821 लोगों की मौत हो गई। इस तरह से भारत में प्रतिदिन कैंसर से 2,150 लोग दम तोड़ देते हैं।

बच्चों का मानसिक विकास अपेक्षाकृत धीमा

ग्रीनपीस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कीटनाशक बच्चों के दिमाग को घुन की तरह खोखला कर रहे हैं। बच्चों का मानसिक विकास अपेक्षाकृत धीमा है। एलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड होलिस्टिक एग्रीकल्चर (आशा) की कविता कुरुघंटी कहती हैं, हर एक खाद्य पदार्थ के लिए कीटनाशकों का अधिकतम अवशेष सीमा निर्धारित होती है, सेब के लिए अलग, टमाटर के लिए अलग। इस तरह दिनभर में तय सीमा से 4 से 5 गुना कीटनाशक जाते हैं।

2014-19 के दौरान 2.5 फीसदी नमूनों में कीटनाशक...
लोकसभा में 9 जुलाई, 2019 को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया था, वर्ष 2014-19 के दौरान कुल 1,18,035 नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 2950 (2.5 फीसदी) नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक अवशेष स्तर (एमआरएल) पाया गया।

वर्ष 2017-18 में खाद्य नमूनों में कीटनाशकों के अवशेष

पदार्थ             कुल नमूने अवशेष मानक से अधिक गैर अनुमोदित
सब्जियां 12,821 2,399 246 1708
फल 2,274 494 25 277
मसाल 1,242 681 150 667
चावल 1,177 256 85 65
गेहूं 783 74 8 42
दालें 771 91 9 82
(स्रोत- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय)
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