देवभूमि द्वारका सिर्फ द्वारकाधीश मंदिर के लिए नहीं बल्कि दो दर्जन टापुओं के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। पर्यटन की दृष्टी से भी यह काफी प्रसिद्ध है। यहां केवल दो टापू बेयत और अजान हैं जिसमें जनजीवन है और आबादी है। जबकि 22 टापू मानव रहित हैं।
इन टापुओं पर केवल धार्मिक स्थल हैं, जहां लोग उत्सव आदि मनाने के लिए आते-जाते रहते हैं। जबकि नरारा टापू वन विभाग के अंदर है जहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। टूर ऑपरेटर इस टापू पर पर्यटकों के आने के लिए बड़े -बड़े विशेष दौरा भी बनाते हैं। लेकिन अब इन टापुओं पर प्रवेश के लिए पहले से इजाजत लेनी होगी।
देवभूमि द्वारका देश की पश्चिमी सीमा पर सबसे संवेदनशील जिला है। जिले में 24 से अधिक टापू हैं। इन टापुओं पर आतंकी प्रवेश न कर सकें इसलिए बिना मंजूरी के प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इन निर्जन टापुओं पर राष्ट्रविरोधी गतिविधि जैसे कि हथियार या नशीले पदार्थों की तस्करी होने की संभावना है। जिला मजिस्ट्रेट जे आर. डोडिया ने टापुओं पर बिना मंजूरी प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगाया है। यह प्रतिबंध 29 नवंबर तक अमल में रहेगा।
ये हैं प्रतिबंधित टापू
धानी उर्फ डनी टापू, गांधीयोकडो टापू , कालूभार टापू , रोजी टापू , पानेरो टापू , गडु टापू , सानबेली टापू ,खीमरोघाट टापू, आशाबा पीर टापू, भैदर टापू, चांक टापू , धबधबो टापू, दीवडी टापू , सामीयाणी टापू , नोरू टापू , मान मरूडी टापू