फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्थायी कमीशन: सुप्रीम कोर्ट का आदेश- अगली सुनवाई तक महिला अधिकारियों को न किया जाए सेवामुक्त

Fri, 01 Oct 2021 09:21 PM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। 

सार

याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी 72 याचिकाकर्ताओं को स्थायी कमीशन के लिए अयोग्य और अक्षम घोषित कर दिया गया है।
विज्ञापन
Supreme Court - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि भारतीय सेना की उन महिला अधिकारियों को सुनवाई की अगली तारीख तक रिलीज नहीं किया जाए जिन्होंने अदालत का रुख करते हुए यह दावा किया है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें स्थायी कमीशन देने से इनकार कर दिया गया है।

विज्ञापन


जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बी वी नागरत्ना की पीठ ने केंद्र सरकार के उस आग्रह को स्वीकार कर लिया कि याचिकाकर्ता के स्थायी कमीशन को खारिज करने के आधार पर विचार करने के लिए थोड़ा समय दिया जाए। पीठ ने केंद्र को आठ अक्टूबर तक एक हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है।

मालूम हो कि मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल नीतिशा के मामले में कहा था कि 60 फीसदी कट-ऑफ को संतुष्ट करने वाली सभी महिला अधिकारी स्थायी कमीशन की हकदार हैं, बशर्ते वे चिकित्सा मानदंडों आदि को पूरा करती हों।
विज्ञापन


शुक्रवार को याचिकाकर्ताओं की दलील दी गई कि दो दिन पहले घोषित परिणामों से यह पता चला है कि 60 फीसदी कट ऑफ को पूरा करने के बावजूद उन्हें स्थायी कमीशन से वंचित कर दिया गया है। कहा गया कि फैसले के बाद भी 72 याचिकाकर्ताओं को स्थायी कमीशन के लिए अयोग्य और अक्षम घोषित कर दिया गया है।

जब जस्टिस चंद्रचूड़ ने एएसजी संजय जैन से पूछा कि यह क्या हो रहा है, उन्होंने जवाब दिया कि यदि 72 अधिकारी अनफिट पाए गए हैं तो 72 अलग-अलग कारण होंगे। सभी अस्वीकृतियों में एक सामान्य कारण नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि कृपया हमें कुछ समय दें ताकि हम 72 फाइलों की जांच कर सकें और तथ्यों और आंकड़ों को रख सकें। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को अगले हफ्ते के लिए टालते हुए कहा कि तब तक याचिकाकर्ताओं को नौकरी से रिलीज न किया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें