डीआरडीओ के परमाणु वैज्ञानिकों की टीम अगर पहली टीम की जांच को सही पाती है तो कस्टम अधिकारी इसे जब्त कर लेंगे। इसके साथ ही जहाज और उसके मालिकों पर विशेष रसायन, सामग्री, उपकरण व प्रौद्योगिकी निर्यात नियमों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया जाएगा।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
भारतीय सुरक्षा अधिकारियों की मुख्य चिंता पाकिस्तान और चीन के बीच परमाणु गठजोड़ को लेकर है। पाकिस्तान ने 1989 में चीन से 34 सोलिड फ्यूल एम 11 बैलेस्टिक मिसाइल का समझौता किया था। एम-11 मिसाइल 300 किलोमीटर तक 500 किलो पेलोड ले जाने में सक्षम है। इससे पाकिस्तान की बैलेस्टिक मिसाइल क्षमता में काफी इजाफा होगा। लिहाजा सुरक्षा एजेंसियां जहाज के पकड़े जाने पर पूरी तरह से सतर्कता बरत रही हैं।
1999 में कोरियाई जहाज भी पकड़ा था
कारगिल युद्ध के दौरान कांडला में एक उत्तर कोरियाई जहाज कू वोई सान भी पकड़ा गया था। पाक जाने वाले इस जहाज से मिसाइल के उपकरण मिले थे।
इस वजह से गहरा रहा शक
जहाजों के रूट पर नजर रखने वाली एक वेबसाइट के मुताबिक यह जहाज जियांगयीन पोर्ट से 17 जनवरी, 2020 को रवाना हुआ था और 3 फरवरी से कांडला में रुका हुआ था। 28 हजार टन से ज्यादा वजनी इस जहाज का निर्माण 2011 में हुआ था। यह जहाज कराची के पोर्ट कासिम जा रहा था, जहां पाकिस्तान का अंतरिक्ष एवं ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग है। पाक का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम यहीं से चलता है।
30 साल पहले भी चीन-पाक में हुए थे गुप्त समझौते
भारतीय सुरक्षा अधिकारियों की चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि पहले भी दोनों देशों के बीच गुप्त समझौते हो चुके हैं। पाकिस्तान और चीन ने 30 साल पहले 1989 में भी ऐसी सांठगांठ की थी। उस समय इस्लामाबाद ने बीजिंग के 34 M-11 बैलिस्टिक मिसाइल खरीदने का सौदा किया था। यह मिसाइल 500 किलो हथियार को 300 किलोग्राम तक ले जाने में सक्षम है। इसी दौरान पाकिस्तान ने उत्तर कोरिया से भी 12 से 25 No-Dong मिसाइल खरीदी थीं। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया के एक जहाज को भी कांडला के निकट पकड़ा गया था, जिसमें जलशोधन उपकरण की आड़ में मिसाइल उपकरणों को ले जाया जा रहा था।