पद्म पुरस्कारों की घोषणा हो चुकी है। पद्मश्री पाने वाले कुल 34 लोगों में दो महिलाएं शामिल हैं। पार्बती बरुआ को देश की पहली महावत होने के कारण चुना गया है। पहली महिला हरिकथा वाचक उमा महेश्वरी डी को भी पद्मश्री से नवाजा जाएगा। जानिए दोनों महिलाओं के बारे में
पार्बती बरुआ को सामाजिक कार्यों के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। असम की पार्बती बरुआ को भारत की पहली महिला महावत होने का गौरव हासिल है। हाथी को चलाने में कुशल पार्बती 14 साल की उम्र में जंगली हाथियों को वश में करना शुरू किया था। रूढ़िवादिता पर काबू पाने के लिए वाली पार्बती ने परंपरागत रूप से पुरुष प्रधान इस काम में अपनी अलग पहचान बनाई। असम की पार्बती के अलावा आंध्र प्रदेश की उमा महेश्वरी डी को भी पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सभी विजेताओं को सम्मानित करेंगी।
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असम की ये महिला 40 साल से सक्रिय हैं
पार्बती ने इंसानों और हाथियों के संघर्ष को टालने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। वैज्ञानिक पद्धति का इस्तेमाल करते हुए इन्होंने तीन राज्यों की सरकारों की सहायता भी की। जंगली हाथियों को पकड़ने में पार्बती को महारत हासिल है। पार्बती को अपने पिता से यह कौशल विरासत में मिला है। 14 साल से काम कर रहीं पार्बती बीते 4 दशकों से अथक प्रयास कर रही हैं। कई लोगों की जान बचाने में इनकी अहम भूमिका रही है।
आंध्र प्रदेश की हरिकथा गायक, संस्कृत भाषा पर बेजोड़ पकड़
उमा महेश्वरी डी पहली महिला हरिकथा गायिका हैं। संस्कृत भाषा में पाठ करने वाली उमा कई रागों में कथाएं सुनाती हैं। भैरवी, शुभपंतुवरलि, केदारम और कल्याणी जैसे रागों में हरिकथा को लोकप्रिय बनाने वाली उमा के योगदान ने कई युवाओं को प्रोत्साहित किया है
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पिछले साल 106 पद्म पुरस्कारों का हुआ था एलान
इससे पहले पिछले साल राष्ट्रपति ने 106 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी थी, इनमें 6 पद्म विभूषण, 9 पद्म भूषण और 91 पद्म श्री शामिल थे। 19 पुरस्कार विजेता महिलाएं थीं। पुरस्कार पाने वालों में 19 महिलाएं हैं। सात लोगों को मरणोपरांत इस सम्मान के लिए चुना गया है। पद्म सम्मान देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं और यह तीन श्रेणियों- पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री में प्रदान किए जाते हैं।
पहले जानें पद्म पुरस्कारों के बारे में
भारत सरकार ने देश के दो सर्वोच्च नागरिक सम्मान - भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में की थी।
इन पुरस्कारों से देश-विदेश के उन लोगों को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने किसी क्षेत्र में कोई प्रतिष्ठित व असाधारण कार्य किया हो, जिसमें लोक सेवा का तत्व जुड़ा हो।
हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर इन पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। फिर मार्च या अप्रैल में होने वाले समारोह में राष्ट्रपति द्वारा विजेताओं को सम्मानित किया जाता है।
सामान्यत: मरणोपरांत ये पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान नहीं है। लेकिन कुछ विशिष्ट मामलों में सरकार के पास ये निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
नियम के अनुसार, किसी को अगर वर्तमान में पद्मश्री दिया गया है, तो फिर उसे पद्म भूषण या पद्म विभूषण अब से पांच साल बाद ही दिया जा सकता है। लेकिन यहां भी कुछ विशिष्ट मामलों में पुरस्कार समिति छूट दे सकती है।
जिस दिन समारोह में राष्ट्रपति द्वारा सम्मान दिया जाता है, उसके बाद सभी विजेताओं के नाम भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए जाते हैं।
पहले क्या थे पुरस्कारों के नाम
1954 में जब भारत रत्न के साथ पद्म पुरस्कारों की शुरुआत हुई, तब सिर्फ पद्म विभूषण नाम अस्तित्व में आया था। पद्मश्री और पद्म भूषण नहीं।
पद्म विभूषण के अंतर्गत ही पहला वर्ग, दूसरा वर्ग और तीसरा वर्ग के नाम से विजेताओं को सम्मान दिया जाता था।
हालांकि ये नामकरण सिर्फ एक साल ही चलन में रहा। फिर 8 जनवरी 1955 को राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी अधिसूचना में इन पुरस्कारों को पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण नाम दिया गया।