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केंद्र ने दी जानकारी: 2020-21 में देशभर में काटे गए 30 लाख से ज्यादा पेड़, दिल्ली में एक भी नहीं 

Mon, 21 Mar 2022 05:27 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

2020-21 के दौरान दिल्ली में विकास परियोजनाओं के लिए एक भी पेड़ नहीं काटा गया, वनरोपण के लिए सबसे अधिक राशि गुजरात (52 करोड़ रुपये) ने खर्च की।
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देशभर में काटे गए 30 लाख से अधिक पेड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि 2020-21 में पूरे भारत में सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण और विकास के लिए लगभग 31 लाख पेड़ काटे गए, लेकिन दिल्ली में एक भी पेड़ नहीं काटा गया है। लोकसभा में उठाए गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत 30,97,721 पेड़ काटे गए और 2020-21 में इसके बदले वनीकरण पर 359 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

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यादव ने एक लिखित बयान में कहा, पेड़ काटने की अनुमति संबंधित राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन द्वारा विभिन्न अधिनियमों, नियमों, दिशा-निर्देशों और अदालतों के निर्देशों के प्रावधानों के तहत दी जाती है। हालांकि, मंत्रालय द्वारा वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के प्रावधानों के तहत 2020-21 के दौरान 30,97,721 पेड़ों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। 

कुल 30.97 लाख पेड़ काटे गए
उन्होंने यह भी कहा कि वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के तहत डायवर्जन प्रस्तावों को मंजूरी एक सतत प्रक्रिया है और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को गैर-वानिकी उपयोग के लिए स्वीकृत वन क्षेत्रों के बदले प्रतिपूरक वनरोपण करना जरूरी है। मंत्री ने सदन को बताया कि 2020-21 में 30.97 लाख पेड़ काटे गए, उस वर्ष के दौरान प्रतिपूरक वनीकरण के हिस्से के रूप में 3.6 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए थे, जिसके लिए सरकार ने 358.87 करोड़ रुपये खर्च किए। 
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दिल्ली में एक भी पेड़ नहीं काटा गया 
मंत्री ने कहा कि 2020-21 के दौरान दिल्ली में विकास परियोजनाओं के लिए एक भी पेड़ नहीं काटा गया, लेकिन प्रतिपूरक वनीकरण योजना के तहत 53,000 से अधिक पौधे लगाए गए, जिसके लिए 97 लाख रुपये खर्च किए गए। मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश (16,40,532) में सबसे अधिक पेड़ काटे गए, इसके बाद उत्तर प्रदेश (3,11,998) और ओडिशा (2,23,375) हैं। हालांकि, वनरोपण के लिए सबसे अधिक राशि गुजरात (52 करोड़ रुपये), उत्तराखंड (48.2 करोड़ रुपये) और हरियाणा (45 करोड़ रुपये) ने खर्च की।

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