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हस्तक्षेप की मांग: किसान आंदोलन और पेगासस जासूसी मामला को लेकर विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से की मुलाकात

Sun, 01 Aug 2021 02:59 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

शिअद,  राकांपा, नेका, शिवसेना, बसपा, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, भाकपा और माकपा ने पत्र के जरिए किसान आंदोलन के दौरान किसानों की मौत के विवरण का पता लगाने के लिए जेपीसी के गठन को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है।
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किसान आंदोलन और पेगासस मामले पर राष्ट्रपति से मिले विपक्षी दल - फोटो : twitter
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विस्तार
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तीनों कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन के दौरान किसानों की मौत के विषय पर संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी) के गठन और पेगासस जासूसी मामले को लेकर विपक्षी दलों ने शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की।

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शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से सरकार को जेपीसी के गठन के लिए कहने और संसद में पेगासस व किसानों के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए हस्तक्षेप का अनुरोध किया।  

 शिरोमणि अकाली दल (शिअद), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)और नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेका) के नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपा। पत्र में राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया था। हालांकि पत्र में कांग्रेस से हस्ताक्षर नहीं थे।
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 राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद शिअद नेता हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि पिछले दो हफ्तों से समूचा विपक्ष सरकार से इन मुद्दों पर मांग कर रहा है कि लोगों से जुड़े इन मुद्दों पर उन्हें संसद में बोलने की अनुमति दी जाए।

उन्होंने कहा, इस मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से संपर्क किया था और चाहती थीं कि ये पार्टियां राष्ट्रपति के साथ बैठक के दौरान उनका साथ दें। लेकिन दुर्भाग्य से कोई भी यहां नहीं पहुंचा।

उन्होंने आरोप लगाया कि संसद को कार्य करने में सक्षम बनाना सरकार का कर्तव्य है लेकिन वह विपक्ष को पत्थर मार रही है। राष्ट्रपति से मिलने वाले नेताओं में मोहम्मद फैजल (राकांपा), हसनैन मसूदी (नेका), रितेश पांडे (बीएसपी) और बलविंदर सिंह भुंदर (शिअद) शामिल थे।

 राष्ट्रपति से सरकार पर दबाव बनाने की अपील
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, हमने राष्ट्रपति से अपील की है कि संसद को सुचारू रूप से चलने देने के लिए वह सरकार पर दबाव बनाए ताकि वह लोगों से जुड़े विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों को माने।

उन्होंने कहा कि किसान पिछले एक साल से सड़कों और आठ महीने से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। इनमें से 500 ने अपनी जान गंवाई है। लेकिन जब कृषि मंत्री कहते हैं कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में किसी किसान की मौत नहीं हुई है, तो यह उनके गुस्से को और बढ़ा देता है। विपक्षी नेताओं की मांग है कि आंदोलन के दौरान जान गवांने वाले किसानों को संसद में श्रद्धांजलि दी जाए।

विपक्ष के एकजुट न होने का फायदा उठा रही भाजपा
हरसिमरत ने कहा, जासूस का मुद्दा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। सरकार इन मुद्दों से क्यों भाग रही है। हमने राष्ट्रपति से राज्यसभा व लोकसभा के सांसदों को शामिल कर एक संयुक्त चयन समिति बनाने की भी अपील की है, ताकि आंदोलनकारी किसानों के लिए एक समाधान निकाला जा सके।

कांग्रेस और टीएमसी के साथ न आने के सवाल पर शिअद नेता ने कहा कि कि जब तक विपक्ष एकजुट नहीं होगा, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा होता रहेगा।

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