रेल यात्रियों को जल्द ही स्टेशनों पर विश्वस्तरीय सुविधाओं का लाभ मिलेगा, लेकिन इसके लिए उन्हें एयरपोर्ट की ही तर्ज पर यूजर डेवलपमेंट चार्ज चुकाना होगा। यह चार्ज उन सभी टिकट पर वसूला जाएगा, जिनकी यात्रा विश्वस्तरीय स्टेशन से शुरू या ऐसे स्टेशन पर खत्म हो रही है।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने बताया कि हबीबगंज व गांधीनगर रेलवे स्टेशन को पायलट प्रोजेक्ट के तहत विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला बनाया जा चुका है, जबकि दिल्ली के आनंद विहार व बिजवासन और चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को विश्व स्तरीय बनाने का टेंडर जारी कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि अगले दो महीने में देहरादून, नई दिल्ली, मुंबई, सूरत, अमृतसर, साबरमती, ग्वालियर, नागपुर स्टेशन के लिए भी टेंडर प्रक्रिया चालू कर दी जाएगी।
रेलवे ट्रैफिक जाम घटाने में खर्च होगा पैसा
दरअसल रेलवे ने ऐसे 58 ‘सुपर क्रिटिकल’ मार्गों की पहचान की है, जिन पर यात्रियों की भारी संख्या के चलते ज्यादा ट्रेन चलने से रास्ते में व स्टेशन पर ‘ट्रैफिक जाम’ सरीखी हालत रहती है। इसके निदान के लिए रेलवे को 9930 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
इसी तरह 68 ‘क्रिटिकल’ मार्गों पर भी 72500 करोड़ रुपया खर्च किया जाएगा। इस काम को रेलवे ने 2021-22 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इतना पैसा जुटाना बेहद कठिन है। इसी कारण रेलवे ने यूजर डेवलपमेंट चार्ज जैसे तरीकों से पैसा जुटाने की सोची है।
स्टेशन पर ही बनेंगे फाइव स्टार होटल और रिहायशी फ्लैट
रेलवे स्टेशन पर ही अब फाइव स्टार होटल की भी सुविधा मिलेगी। आईआरएसडीसी के सीईओ एसके लोहिया ने बताया कि गांधीनगर स्टेशन पर रेलवे ट्रैक के ऊपर फाइव स्टार होटल निर्मित किया गया है और यह प्रयोग सफल रहा है।
इसे अन्य स्टेशनों पर भी अपनाया जाएगा। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन रिहायशी फ्लैट बनाकर 99 साल की लीज पर दिए जाएंगे। इन फ्लैटों की बिक्री स्टेशन पर विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने वाली कंपनी करेगी।
सर्विस मर्जर हर सूरत में होगा
रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि रेलवे की 8 सर्विस को आपस में मर्ज कर एक सर्विस में बदलने का निर्णय फाइनल है और इसमें अब कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय लोकसेवा आयोग को भी अब रिक्तियां नहीं निकालने को कह दिया गया है।
यह भी है तैयारी
- 12 क्लस्टरों पर प्राइवेट कंपनियों की 150 ट्रेन चलाने की तैयारी
- रेलवे अगले महीने टेंडर जारी करेगा इन प्राइवेट ट्रेन के लिए
- चार कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं ट्रेन को 160 की रफ्तार से चलाने को
- 34 हजार किमी रेल ट्रैक पर 5 साल में आधुनिक सिग्निलिंग सिस्टम