भारतीय जनता पार्टी की सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार उन्होंने वापस लिए जा चुके तीन कृषि कानूनों पर बयान दिया है। दरअसल, उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे वापस लिए जा चुके कृषि कानूनों को फिर से लागू करने की बात करते दिखाई दे रही हैं। वीडियो में मंडी सीट से सांसद एक वक्त विवादों में घिरे कृषि कानूनों पर बोलती नजर आ रही हैं। इसमें कंगना इन कानूनों को दोबारा लागू करने की वकालत करती नजर आ रही हैं।
इस पर कांग्रेस ने कड़ी टिप्पणी की है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि जिन तीन काले किसान विरोधी कानूनों की मुखालिफत करते 750 से ज्यादा किसान शहीद हो गए। उनको दोबारा से लाने की कोशिश की जा रही है। हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे। सबसे पहला जवाब हरियाणा देगा।
कंगना ने क्या कहा था?
दरअसल, वीडियो में कंगना को यह कहते हुए देखा जा सकता है कि किसानों के वह कानून, जो अब वापस ले लिए गए हैं, मुझे पता है कि यह बयान विवादास्पद हो सकता है, लेकिन तीन कृषि कानूनों को वापस लाया जाना चाहिए। किसानों को खुद इसकी मांग करनी चाहिए। तीन कानून किसानों के लिए फायदेमंद थे। जैसे बाकी जगहों के किसान समृद्ध हो रहे हैं, हमारे किसानों को समृद्ध होना चाहिए। कुछ राज्यों में किसान समूहों के विरोध के कारण सरकार ने इन्हें वापस ले लिया था। किसान देश के विकास में स्तंभ हैं। मैं उनसे हाथ जोड़कर अपील करती हूं कि वे अपने भले के लिए कानूनों को वापस मांगें।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने वीडियो साझा करते हुए एक्स पर लिखा, 'किसानों पर थोपे गए तीन काले कानून वापस लाने की बात कंगना रनौत कर रही हैं। देश के 750 से ज्यादा किसान शहीद हुए, तब जाकर मोदी सरकार की नींद टूटी और ये काले कानून वापस हुए। अब भाजपा के सांसद फिर से इन कानून की वापसी का योजना बना रहे हैं। कांग्रेस किसानों के साथ है। इन काले कानून की वापसी अब कभी नहीं होगी।
कंगना के बयान से भाजपा ने पल्ला झाड़ा
हालांकि, मामला तूल पकड़ने पर भारतीय जनता पार्टी ने कंगना के बयान से किनारा कर लिया है। पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, 'सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भाजपा सांसद कंगना रनौत का केंद्र सरकार द्वारा वापस लिए गए कृषि बिलों पर दिया गया बयान वायरल हो रहा है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह बयान उनका निजी बयान है। कंगना रनौत भाजपा की ओर से ऐसा बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। यह कृषि बिलों पर भाजपा के दृष्टिकोण को नहीं दर्शाता है। हम इस बयान को अस्वीकार करते हैं।'