अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने वाले तालिबान को भारत, अमेरिका, रूस, ईरान, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात समेत किसी भी देश ने अभी औपचारिक मान्यता नहीं दी है लेकिन उसे परोक्ष रूप से हर एक देश से स्टेट के तौर पर समर्थन मिलने लगा है।
भारत की अध्यक्षता वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने अफगानिस्तान व आतंकवाद से संबंधित ताजा बयान में तालिबान का नाम हटाकर इसे और बल दिया है। उधर तालिबान ने एक दिन पहले ही भारत को अहम साझेदार बताते हुए उसे खुला न्योता देकर अफगानिस्तान में बनने वाले नए समीकरण के ठोस संकेत दिए।
सूत्रों ने बताया कि तालिबान पर पूरे विश्व की पैनी नजर है लेकिन तालिबान ने अमेरिका और नाटों को समर्थन देने वाले पुराने अफगानिस्तान सरकार के मुलाजिमों को आम माफी की घोषणा कर सधी हुई कूटनीतिक चाल चली है। अब भारत इन नए समीकरणों के जरिए अफगानिस्तान में पाकिस्तान का दबदबा कम करने की योजना पर काम कर रहा है।
उधर, अमेरिका समेत क्वाड और नाटो देश तालिबान की मदद से चीन और आईएस व अल कायदा समेत अन्य आतंकी गुटों को काबू करने के पक्ष में हैं। इन देशों की आपसी बातचीत में यह बात सामने आई है कि अगर तालिबान को स्टेट का औपचारिक दर्जा नहीं दिया जाता है तो हालात और बेकाबू हो सकते हैं।
सूत्रों ने बताया, तालिबान 31 अगस्त के बाद सभी सरकारी भवनों और मुख्य ठिकानों पर अपने औपचारिक हक का एलान कर सकता है। तालिबान जल्द से जल्द पंजशीर के अमरुल्ला सालेह और अहमद मसूद के लड़ाकों से मिलने वाली गंभीर चुनौती से भी निपटना चाह रहा है।
इस स्थिति में तालिबान भी सधी हुई कूटनीतिक कदम उठाने के लिए कई देशों के साथ संपर्क में है। उधर, अब्दुल्ला अब्दुल्ला की अध्यक्षता वाली हाई काउंसिल फॉर नेशनल रिकाउंसिलेशन (एचसीएनआर) भी तालिबान को औपचारिक सरकार में तब्दील करने के लिए सांविधानिक नियमों में बदलाव और तकनीकी सरकार संचालन के तरीकों पर तेजी से काम कर रहा है। आने वाले हफ्तों में इस संदर्भ में ठोस औपचारिक घोषणा हो सकती है।