उन्होंने कहा कि असम के एक भी व्यक्ति ने सीएए के तहत आवेदन नहीं किया है, जबकि गुजरात में लोगों ने ऑनलाइन प्रक्रिया से नागरिकता हासिल की है। उन्होंने कहा, पोर्टल पर पूछताछ करें कि कितने लोगों ने आवेदन किया है। असम से अभी तक एक भी आवेदन नहीं किया गया है। गुजरात में लोगों को (सीएए के तहत ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए) भारतीय नागरिकता मिल गई है।
सीएए के प्रावधानों के तहत नागरिकता के लिए आवेदकों को एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपना अनुरोध प्रस्तुत करना होगा। सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान हुई मौतों का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि जो भी इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें उनके द्वारा किए गए कृत्यों का जवाब देना होगा। उन्होंने कहा, कई लोगों को अब इन पांच लोगों की मौत का जवाब देना होगा।
इस बीच, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन सहित विभिन्न संगठनों और तीस अन्य स्वदेशी, गैर-राजनीतिक समूहों ने विवादास्पद कानून के खिलाफ प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखते हुए जिला मुख्यालयों पर सत्याग्रह किया। उन्होंने सीएए के खिलाफ लोकतांत्रिक विरोध के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि कानून को निरस्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।
सीएए के लागू होने के बाद से सोमवा से इसके विरोध में प्रदर्शन हो हे हैं। इस बात की चिंता जताई जा रही है कि यह 1985 के असम समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहा है। समझौते में कहा गया है कि 25 मार्च, 1971 के बाद अवैध रूप से असम में प्रवेश करने वाले विदेशियों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें मतदाता सूची से हटाया जाना चाहिए और निर्वासित किया जाना चाहिए।