प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटक मिलने और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में विशेष एनआईए अदालत ने सचिन वाजे को राहत दी है। एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने मुंबई पुलिस के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाजे और सुनील माने को हिरासत में लेने की मांग की थी, जिसे अदालत ने मानने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने वाजे को हृदय संबंधी समस्याओं को लेकर निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति भी दी। दोनों अभी तलोजा जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
एनआईए ने अपनी याचिका में सीआरपीसी की धारा 161 के बयानों को लेकर दिए गए गवाहों के बयानों के मामले में वाजे और माने को गवाहों के सामने बैठाने के लिए हिरासत में भेजने की मांग की थी। एजेंसी ने पिछले हफ्ते वाजे को दो दिनों के लिए और माने को पांच दिनों के लिए हिरासत में भेजने के लिए विशेष अदालत में आवेदन दाखिल किया था।बता दें कि एनआईए ने दोनों आरोपियों की और हिरासत की मांग करते हुए कहा था कि वह इस मामले में गवाहों के बयानों की पुष्टि करने के लिए वाजे और माने से पूछताछ करना चाहती है।
वाजे ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति का हवाला देते हुए अदालत ने निजी अस्पताल में उपचार करवाने की अनुमति देने का आग्रह किया था। वाजे के वकील ने अदालत को बताया कि उसके हृदय की तीन धमनियों में 90 फीसदी रुकावट है और चिकित्सकों ने उसे तत्काल सर्जरी की सलाह दी है। वाजे ने अपने वकील के माध्यम से अदालत से कहा कि मैं आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता और पादरी स्टेन स्वामी की तरह हिरासत में नहीं मरना चाहता हूं। स्वामी की बीती पांच जुलाई को स्वास्थ्य आधार पर जमानत के इंतजार के दौरान मृत्यु हो गई थी।
जानिए क्या है पूरा मामला
वाजे को एनआईए ने मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर एक कार में मिले विस्फोटकों की जांच के मामले में मार्च में गिरफ्तार किया था। 25 फरवरी को एंटीलिया के बाहर मिले विस्फोटक के इस मामले में वाजे मुख्य आरोपी है। इसके अळावा वह मनसुख हिरेन की मौत का आरोपी भी है। हिरेन उस गाड़ी का मालिक था जिसमें विस्फोटक पाए गए थे। हिरेन को पांच मार्च को ठाणे में मृत पाया गया था। मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट में सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) वाजे को मई 2021 में बर्खास्त कर दिया गया था।