राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मानव तस्करी के मामले में बांग्लादेश के दो नागरिकों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। आरोप है कि दोनों ने 10 साल पहले अवैध रूप से भारत में घुसपैठ की। इसके बाद बांग्लादेश के अन्य नागरिकों को भी भारत में घुसपैठ करवा कर मजदूरी करने के लिए मजबूर किया। एनआईए की जांच में पता चला है कि मुहम्मद सहजलाल हलदर और मुहम्मद इदरीस उर्फ एर्दिश खान ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बेनापोल के जरिये घुसपैठ की थी। इसके बाद दोनों ने शुरूआत में कूड़ा बीनने का काम किया। बता दें कि बेनापोल, बांग्लादेश के जेसोर जिले में स्थित एक शहर है।
एनआईए ने चार्जशीट में लगाए ये आरोप
एनआईए ने अपने बयान में कहा कि कूड़ा बीनने के काम के बाद सहजलाल और इरदिश ने कर्नाटक के मारगोंडानहल्ली में जमीन किराए पर ली। इस जमीन पर दोनों ने गोदामों और अस्थायी शेडों का निर्माण कर कचरा पृथक्करण इकाइयां शुरू कीं। इसके बाद दोनों आरोपियों ने बांग्लादेश से मानव तस्करी करना शुरू कर दिया। बांग्लादेश से तस्करी कर भारत लाए गए नागरिकों को रोजगार दिया जाता था। एनआईए ने कहा है कि सहजलाल और इरदिश ने बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की धमकी दी और कम वेतन पर कड़ी मेहनत करने के लिए मजबूर किया।
मानव तस्करी का बड़ा नेटवर्क
एजेंसी की जांच में पता चला है कि यह मानव तस्करी का बड़ा नेटवर्क है। यह भी कहा गया कि दोनों के खिलाफ बंगलूरू में विशेष एनआईए अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया था। जांच एजेंसी ने बताया कि दोनों आरोपियों को कर्नाटक पुलिस की मदद से फरवरी में गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने पिछले साल 7 नवंबर को इस संबंध में एक मामला दर्ज किया था। उस दौरान बताया गया था कि कर्नाटक स्थित कुछ संस्थाओं की ओर से भारत, बांग्लादेश, असम और त्रिपुरा में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद एनआईए ने पूरे देश में तलाशी अभियान चलाया और कई आरोपियों की गिरफ्तारी की। इस रैकेट में शामिल दलालों और अन्य संदिग्ध तस्करों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।