देश में सोन चिरैया, सोहन चिड़िया, गोडावण के नाम से चर्चित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की बिजली के तारों की चपेट में आकर होने वाली मौतों से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) बेहद नाराज है।
एनजीटी ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया है कि वे चार महीने में बिजली के सभी तारों पर पक्षी भगाने वाले उपकरण लगाएं और साथ ही नए तारों को भूमिगत बिछाएं, ताकि विलुप्तप्राय प्रजाति में शामिल ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को बचाया जा सके।
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने यह आदेश छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट पर विचार करने के बाद जारी किया। पहले से चल रही और नई बिजली परियोजनाओं में आदेश पर अमल किया जाना अनिवार्य है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की मौत की वजह वायु या सौर ऊर्जा परियोजनाओं के बिजली के तार हैं, जिनकी चपेट में ये पक्षी आ जाते हैं। उड़ने वाले पक्षियों में सबसे ज्यादा वजनी ये पक्षी जैव विविधता वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ऐसे में इन इलाकों में बिजली परियोजनाओं के प्रभावों पर नजर रखी जाए।
एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी कहा कि राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को समिति के सुझावों पर अमल करते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही भारतीय वन्यजीव संस्थान को साल में दो बार आदेश के अमल पर निगरानी करनी होगी।
गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल है यह पक्षी
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड बड़े आकार का पक्षी है जो भारत के राजस्थान तथा सीमावर्ती पाकिस्तान में पाया जाता है। पहले यह भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के घास के मैदानों में व्यापक रूप से पाया जाता था।
हालांकि, घटती आबादी के बाद यह पक्षी राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में पाया जाता है। लाल डाटा पुस्तिका में इसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। यह सर्वाहारी पक्षी है। राजस्थान में अवस्थित राष्ट्री मरु उद्यान में घटती आबादी को बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं।