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कृषि कानूनों की वापसी: शरद पवार बोले- चुनाव पास आए तो लिया गया फैसला, उद्धव ने केंद्र को दी ये सलाह

Fri, 19 Nov 2021 05:09 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन नए कृषि कानूनों को किसानों के लंबे आंदोलन के बाद अब वापस लेने का फैसला किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। केंद्र सरकार के इस यू-टर्न पर कई नेताओं की प्रतिक्रिया आ रही है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने केंद्र पर चुनाव के चलते यह फैसला लेने का आरोप लगाया है तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने केंद्र को एक सलाह दी है।पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
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एनसीपी प्रमुख शरद पवार - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि 10 साल तक केंद्रीय कृषि मंत्री रहने के तौर पर मैंने किसानों के मुद्दे पर, जो कि राज्यों का विषय है, यह तय किया था कि सभी भागीदारों को विश्वास में लिए बिना कृषि कानूनों से संबंधित कोई भी नया मानक बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों से दो बार सलाह मांगी थी लेकिन इस सरकार ने बिना किसी चर्चा के ही तीनों कानून लागू कर दिए थे।

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पवार ने आरोप लगाया कि केंद्र ने यह कदम केवल चुनावों के पास आने की वजह से किया है। उन्होंने कहा कि अब जब उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव नजदीक आ रहे हैं और हरियाणा व पंजाब में लोग भाजपा का विरोध कर रहे हैं तब उन्होंने कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि हम यह नहीं भूल सकते कि इसी सरकार के कार्यों कारण देश के किसानों को एक साल तक विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन करना पड़ा। 
 

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भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी से बचने के लिए अन्य दलों को भरोसे में ले केंद्र: ठाकरे

वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कृषि कानूनों को वापस लेने के इस निर्णय पर केंद्र सरकार को एक सलाह दी है। ठाकरे ने कहा कि केंद्र सरकार को भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी के बचने के लिए अन्य पार्टियों को भरोसे में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला देश में आम आदमी की ताकत को प्रदर्शित कर करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन तीनों कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में लोग इन कानूनों के खिलाफ थे। इन कानूनों पर, इनके प्रावधानों पर और संभावित समस्याओं पर महाराष्ट्र विधानसभा के सत्रों के दौरान विस्तार से चर्चा की गई थी। यहां तक कि महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने भी इन तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आपत्ति जताई थी। मैं केंद्र सरकार के इस कदम का स्वागत करता हूं कि उन्होंने आने वाले समय में इन कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है।
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