नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि आम्रपाली परियोजनाओं की संरचनात्मक सुरक्षा में कोई समस्या नहीं है। इसने यह भी बताया कि वीएनआईटी, नागपुर और एनआईटी, जालंधर को इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट करने के लिए नियुक्त किया गया है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि आम्रपाली की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के मद्देनजर बैंक ऑफ बड़ौदा ने 300 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है।
जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ के समक्ष एनबीसीसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्दार्थ दवे ने कहा कि सभी परियोजनाएं सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि पिछली सुनवाई में घर खरीदारों के वकील द्वारा उन आवास परियोजनाओं की गुणवत्ता के मुद्दों को उठाया, जिनमें एनबीसीसी परियोजना प्रबंधन सलाहकार है। दवे ने कहा कि मीडिया में इसे लेकर नकारात्मक रिपोर्टिंग हुई। दवे ने पीठ को सूचित किया कि उनके मुवक्किल ने वीएनआईटी, नागपुर और एनआईटी, जालंधर को इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट करने के लिए नियुक्त किया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट सलाहकार वरिष्ठ वकील एन वेंकेटरमणी ने पीठ को बताया कि कंसोर्टियम ऑफ बैंक की अगुवाई करने वाली बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से बताया गया है कि आम्रपाली की परियोजनाओं के लिए 300 करोड़ रुपये की राशि मंजूर कर दी गई है। बाकी बैंक ने कुछ वक्त मांगा है।
कोर्ट सलाहकार के बयान के बाद पीठ ने कंसोर्टियम ऑफ बैंक के बाकी बैंकों को एक हफ्ते में प्रोजेक्ट के लिए फंड की मंजूरी देने के लिए कहा है और अगले सोमवार तक अवगत कराने के लिए कहा है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बैंकों से कहा था कि वे 15 मार्च तक प्रोजेक्ट की फंडिंग शुरू करें। अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
21 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में घर खरीदारों के वकील एमएल लाहौटी ने आम्रपाली परियोजनाओं की गुणवत्ता के मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि एनबीसीसी की ग्रीन व्यू सोसाइटी में प्रमुख संरचनात्मक खामियां हैं। इसमें 650 से अधिक आवास इकाइयां हैं।
लाहौटी ने इस मामले पर शीर्ष अदालत से संज्ञान लेने का आग्रह किया था। मालूम हो कि एनबीसीसी, आम्रपाली परियोजनाओं के लिए परियोजना प्रबंधन सलाहकार है और काम की गुणवत्ता और समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी उस पर है।