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Sameer Wankhede Vs Nawab Malik: क्या मुस्लिम दलित को नौकरी में मिलता है आरक्षण, एनसीपी नेता के आरोपों में कितना है दम?

Fri, 29 Oct 2021 09:50 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

नवाब मलिक का आरोप है कि समीर वानखेड़े के पिता मुस्लिम हैं। समीर एक पैदाइशी मुसलमान हैं और उन्होंने अपने दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर नौकरी हासिल की है। 
 
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समीर वानखेड़े और नवाब मलिक - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Sameer Wankhede Vs Nawab Malik: मुंबई क्रूज ड्रग पार्टी मामले में शुरू हुई जांच अब एनसीबी नेता नवाब मलिक द्वारा समीर वानखेड़े पर लगाए गए आरोपों पर आकर टिक गई है। नशीली दवाओं के नेटवर्क का भंडाफोड़ इस चर्चित मामले की प्राथमिकता से बाहर हो चुका है बल्कि जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि आर्यन खान को गिरफ्तार करने वाले जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े हिंदू हैं या फिर मुसलमान। अगर वह मुसलमान हैं और उन्होंने दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाई है तो यह बड़ा आरोप है। हालांकि, इससे पहले भारत के संविधान में किए गए प्रावधानों को भी जानना जरूरी होगा। आइए, जानते हैं कि क्या दलित मुसलमान को भी मिलता है नौकरी में आरक्षण?

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क्या है वानखेड़े पर आरोप 
एनसीपी नेता नवाब मलिक का आरोप है कि एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े पैदाइशी मुसलमान हैं। अपने दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करके उन्होंने दलित या फिर अनुसूचित जाति का सदस्य बनकर आईआरएस की नौकरी हासिल की है। अपने आरोपों  को साबित करने के लिए नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े के निकाह के फोटोग्राफ भी सार्वजनिक किए साथ ही निकाहनामा व समीर वानखेड़े का जन्म प्रमाणपत्र भी साझा किया था। मलिक का आरोप है कि समीर वानखेड़े के पिता मुस्लिम हैं। 

समीर मुसलमान हैं तो समस्या क्या है?
भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। भारत का संविधान भारत में रहने वाले लोगों को धर्म की स्वतंत्रता देता है और धार्मिक स्वतंत्रता को मौलिक अधिकारों के रूप में गारंटी भी देता है। कानून के तहत अनुसूचित जाति के लिए सरकारी नौकरी में 15 प्रतिशत आरक्षण है। यह प्रावधान 1950 का है। इसमें दो बार संसोधन किए गए। पहला 1956 में और दूसरा 1990 को। इसके तहत हिंदू, सिख या फिर बौद्ध धर्म को मानने वाले व्यक्ति के अलावा किसी भी व्यक्ति को अनुसूचति जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में  इस बात की पुष्टि हुई है कि मुसलमान दलित हैं। 
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क्या मुसलमानों को भी मिलता है आरक्षण 
भारत के संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं किया गया है। संविधान जातीय आरक्षण की बात करता है। हालांकि, कुछ राज्यों यहां तक कि केंद्र में भी कुछ सूचियों में मुस्लिम वर्ग को नौकरी में आरक्षण दिया गया है, लेकिन उन्हें यह आरक्षण पिछड़ा या अति पिछड़ा वर्ग के रूप में मिलता है न कि मुसलमान के रूप में। यह बात स्पष्ट है कि दलित या फिर अनुसूचित जाति के कोटे में कोई भी मुस्लिम आरक्षण का दावा नहीं कर सकता है। नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े पर ऐसा ही करने का आरोप लगाया है।

जाति से बाहर शादी, धर्मांतरण मामले में क्या होता है?
सुप्रीम कोर्ट ने 1950 में इस मामले में एक आदेश दिया था। इसमें यह स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति आरक्षण का लाभ लेना चाहता है तो उसे एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वह जन्म से अनुसूचित जाति से है इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि अंतरजातीय विवाह किसी व्यक्ति की जन्म की जाति की स्थिति को परिवर्तित नहीं कर सकता है। इस विवाह से उत्पन्न संतानों को पिता की जाति का माना जाएगा। अगर मां अनुसूचति जाति की है तो बच्चों को यह साबित करना होगा कि उन्हें एससी सदस्य के रूप में पाला गया है। 

क्या होगा अगर समीर वानखेड़े पर साबित हुआ आरोप 
एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े पर नवाब मलिक के आरोप सही साबित होते हैं तो समीर वानखेड़े को नौकरी से इस्तीफा देना होगा। इतना ही नहीं उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा, साथ ही वेतन की वसूली भी की जा सकती है। 

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