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Makar Sankranti : भारत का यह प्रसिद्ध मंदिर, जहां मकर संक्रांति पर पड़ती है सूर्य की पहली किरण

Thu, 14 Jan 2021 01:25 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगौन
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navgrah mandir khargone - फोटो : Social Media
पूरे देश में गुरुवार को मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। वहीं मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थिति प्राचीन नवग्रह मंदिर का मकर संक्रांति पर काफी महत्व है। मकर संक्रांति पर यहां सूर्य देव की प्रतिमा पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है। देश का दूसरा ऐसा यह मंदिर है, जहां सूर्य की पहली किरण आती है। इस मंदिर में चारों ओर नवग्रहों की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं। यहीं वजह है कि देश भर से श्रद्धालु यहां भगवान के दर्शन के लिए आते हैं।
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नवग्रह मंदिर सूर्य किरण प्रवेश मार्ग - फोटो : Social Media
मकर संक्रांति के दिन प्राचीन नवग्रह मंदिर में सूर्योदय से पहले ही भक्तों की भीड़ जमा होने लगती है। मकर संक्रांति पर सूर्य मंदिर में सूरज की पहली किरण मंदिर के गुंबद से होते हुए भगवान सूर्य की मूर्ति पर पड़ती है। संक्रांति पर प्राचीन नवग्रह मंदिर में सुबह तीन बजे से लोगों की भीड़ लग जाती है।
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नवग्रह मंदिर खरगोन - फोटो : Social Media
प्रसिद्ध नवग्रह मंदिर के पुजारी लोकेश जागीरदार का कहना है कि मकर संक्रांति, सूर्य की आगवानी का पर्व होता है। नवग्रह मंदिर सूर्य प्रधान है। यहां गर्भग्रह में सूर्य की मूर्ति बीच में विराजित है, मूर्ति के आसपास अन्य ग्रह हैं। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा की जाती है, तो नवग्रह की कृपा होती है, वर्षभर के लिए हमें ग्रहशांति का फल मिलता है। प्राचीन ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार मंदिर की रचना की गई है।

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नवग्रह मंदिर खरगोन - फोटो : Social Media
नवग्रह मंदिर की वजह से खरगोन का नवग्रह नगरी भी कहा जाता है। इस मंदिर की स्थापना 600 साल पहले हुई है। इसकी स्थापना शेषप्पा सुखावधानी वैरागकर ने की थी। शेषप्पा मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले थे। वह अष्टम् महाविद्या बगलामुखी देवी के उपासक थे।
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नवग्रह मंदिर खरगोन - फोटो : Social Media
विशेष मंदिर की रचना
प्राचीन ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार इस मंदिर की रचना की गई है। मंदिर में प्रवेश करते समय सात सीढ़ियां हैं, जो सात वार का प्रतीक है। इसके बाद ब्रह्मा विष्णु स्वरूप के रूप में मां सरस्वती, श्रीराम और पंचमुखी महादेव के दर्शन होते हैं। फिर गर्भगृह में जाने के लिए जहां 12 सीढ़ियां उतरनी होती है, जो 12 महीने की प्रतीक हैं। गर्भ गृह में नवग्रह का दर्शन होता है। इसके बाद दूसरे मार्ग पर फिर 12 सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते हैं, जो 12 राशियों की प्रतीक हैं। इस प्रकार से सात वार, 12 महीने, 12 राशियां और नवग्रह इनके बीच में हमारा जीवन चलता है और उसी आधार पर मंदिर की रचना की गई है।
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