उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बिल में जनगणना का पेंच फंसा दिया है। इस कारण इसका लाभ 2040 में ही जाकर महिलाओं को मिल पाएगा। जबकि समय की मांग यह है कि महिलाओं को तत्काल आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए। सरकार चाहे तो ठीक इसी समय एक नोटिफिकेशन के जरिए 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इसे लागू कर सकती है। ऐसे में यही कहा जाएगा कि सरकार ने बिल पास करने के बाद भी इससे महिलाओं को होने वाले लाभ को रोक दिया है। वे मांग करते हैं कि सरकार अपनी गलती सुधारे और इसी चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण देने की घोषणा करे।
सबका साथ मिला, अपना जयगान न करें प्रधानमंत्री
कांग्रेस प्रवक्ता रितु चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि पूरा देश जानता है कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने का सबसे पहला काम राजीव गांधी की सरकार ने किया था। वे संसद और विधानसभाओं में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना चाहते थे, लेकिन कुछ दलों के असहयोग के कारण यह संभव नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि आज जब हर राजनीतिक दल ने इस बिल को पास कराने में अपना सहयोग दिया है, प्रधानमंत्री को इसे केवल भाजपा की सफलता नहीं बताना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस की सभी सरकारों ने महिला केंद्रित नीतिया बनाकर उन्हें आर्थिक और सामाजिक मजबूती प्रदान करने में अपना सहयोग दिया है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। इस अवसर को किसी की आलोचना करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।