तोमर ने छात्र जीवन से ही राजनीति में अपनी धाक बनानी शुरू कर दी थी। 1979-80 में कॉलेज के दिनों में ही वह मुरार गवर्मेंट कॉलेज में छात्र संगठन के अध्यक्ष बने थे। इसके बाद ग्वालियर में ही वह साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी यूथ फोरम यानि कि भाजयुमो के अध्यक्ष बने और 1984 तक पद पर रहे। इसी बीच वह ग्वालियर नगर निगम के पार्षद निर्वाचित हुए और फिर भाजपा यूथ फोरम के प्रदेश मंत्री भी बना दिए गए।
उनका शुरुआती राजनीतिक जीवन भाजपा के यूथ फोरम में ही गुजरा। साल 1986 से 1990 तक वह भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष रहे और यूथ और सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। विधायक के तौर पर निर्वाचित होने के बाद साल 2003 से 2007 तक नरेंद्र सिंह मध्य प्रदेश में कैबिनेट मंत्री रहे, जबकि जनवरी 2007 से मार्च 2009 तक वह राज्यसभा सांसद रहे।
2009 में हुए लोकसभा चुनाव में मुरैना से जीत हासिल करके तोमर लोकसभा पहुंचे। नरेंद्र सिंह ने 2014 में सिंधिया राजघराने के प्रभाव वाली सीट से जीत का परचम लहराया और मोदी सरकार में मंत्री बने।
2014 लोकसभा चुनाव में मुरैना सीट से अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा ने 1.23 लाख वोटों से जीत हासिल की थी और सांसद बने थे। 2019 लोकसभा चुनाव में वह मैदान से बाहर कर दिए गए। भाजपा ने इस बार अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा का टिकट का काटकर 2014 में तोमर को मैदान में उतारा था। इस बार यहां मुख्य मुकाबला भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर और कांग्रेस के रामनिवास रावत के बीच था। तोमर ने कड़ी चुनावी जंग में कांग्रेस के रामनिवास रावत को शिकस्त दी।