एक केंद्रीय मंत्री या सांसद को कई विशेषाधिकार मिलते हैं लेकिन इनमें से अधिकांश तभी उपलब्ध होते हैं जब संसद का सत्र चल रहा होता है। अगर संसद का सत्र नहीं चल रहा है तब किसी आपराधिक मामले में पुलिस या अन्य कानू प्रवर्तन एजेंसियां एक कैबिनेट मंत्री को गिरफ्तार कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए सूचना देना जरूरी होता है।
चूंकि, नारायण राणे राज्यसभा सांसद हैं, ऐसे में उनके मामले में यह सूचना राज्यसभा चेयरमैन एम वेंकैया नायडू को देनी थी। राज्यसभा की कार्यवाही एवं आचरण के नियमों की धारा 22ए के तहत गिरफ्तारी का आदेश जारी करने के लिए पुलिस या न्यायाधीश को राज्यसभा चेयरमैन को कारण और गिरफ्तारी के स्थान की जानकारी देनी होती है।
केंद्रीय मंत्रियों को गिरफ्तारी से सुरक्षा की व्यवस्था है, खासतौर पर दीवानी के मामलों में। उल्लेखनीय है कि एक केंद्रीय मंत्री या सांसद को संसद का सत्र शुरू होने से 40 दिन पहले, उसकी बैठकों के दौरान और उसके समापन के 40 दिन बाद तक गिरफ्तारी से सुरक्षा दिए जाने का प्रावधान है।
राणे के पास नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 135 के तहत दीवानी के मामले में गिरफ्तारी से संरक्षण है। लेकिन, यह गिरफ्तारी आपराधिक मामले के तहत की गई है जिसमें वह मुख्यमंत्री को धमकी देने के आरोपी हैं। गिरफ्तारी से सुरक्षा में आपराधिक कृत्य या निवारक निरोध शामिल नहीं है।