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नगा शांति वार्ता: सीएम रियो बोले- शीघ्र समाधान के लिए एक साथ आए सभी दलों के विधायक, यह पार्टी का शीर्ष एजेंडा

Sat, 16 Sep 2023 11:19 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा

सार

Naga Peace Talks: नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने शनिवार को कहा कि नगा शांति वार्ता के जल्द समाधान के लिए दबाव बनाने के लिए विधानसभा में सभी राजनीतिक दलों के विधायकों एक साथ आए हैं।
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पीएम मोदी के साथ नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो। - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने शनिवार को कहा कि नगा शांति वार्ता के जल्द समाधान के लिए दबाव बनाने के लिए विधानसभा में सभी राजनीतिक दलों के विधायकों एक साथ आए हैं। फरवरी में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) की पहली आम सभा को संबोधित करते हुए रियो ने कहा कि यह पार्टी का शीर्ष एजेंडा है।

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2021 में, सभी दलों ने पूर्वोत्तर राज्य में विपक्ष रहित सरकार बनाने के लिए हाथ मिलाया। विधानसभा चुनाव के बाद मार्च 2023 में दूसरी बार ऐसा किया गया।

उन्होंने कहा, 'हम न केवल नेतृत्व की वजह से बल्कि इस मुद्दे के लिए भी साथ आए। हम जल्द समाधान खोजने की दिशा में काम करना जारी रखेंगे।' मुख्यमंत्री ने कहा कि दल विहीन सरकार ने सभी स्तरों पर पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखी है। उन्होंने कहा, 'एक पार्टी के रूप में एनडीपीपी सिर्फ छह साल पुरानी है, लेकिन हमने गठबंधन सहयोगी भाजपा के समर्थन से लगातार दो बार राज्य आम चुनाव जीते हैं। अन्य सभी राजनीतिक दल विपक्ष रहित सरकार के लिए आगे आए।'
 

मुख्यमंत्री ने कहा कि नगालैंड के पास अपने बहुत कम संसाधन हैं और राज्य सरकार को केंद्र के समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र के साथ गठबंधन होता भी है तो राज्य सरकार का ध्यान नगाओं पर है और यही वजह है कि लोग एनडीपीपी का समर्थन कर रहे हैं। सामूहिक सफलता के लिए धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, 'हम जो कुछ भी हासिल करते हैं, वह पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के समर्पण और प्रतिबद्धता से होता है।'
 

नागालैंड में स्थायी शांति लाने के लिए केंद्र और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (इसाक-मुइवा) के बीच 2015 में एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता 18 वर्षों में 80 से अधिक दौर की बातचीत के बाद हुआ, जिसमें पहली सफलता 1997 में मिली जब नागालैंड में दशकों के विद्रोह के बाद संघर्ष विराम समझौते पर मुहर लगाई गई, जो 1947 में स्वतंत्रता के तुरंत बाद शुरू हुई थी।
 
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हालांकि, अंतिम समाधान अभी तक सामने नहीं आया है, क्योंकि एनएससीएन (आईएम) की अलग झंडे और संविधान की लगातार मांग को स्वीकार करने के लिए सरकार अनिच्छुक है।
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