देश में इन दिनों जनसभाओं, चुनावी रैलियों, रोड शो का दौर चल रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज एजेंसीं एएनआई को एक साक्षात्कार दिया है। इसमें उन्होंने जहां विपक्ष के आरोपों को लेकर जवाब दिया है वहीं, भविष्य की अपनी योजनाओं और भारत को और विकसित बनाने पर चर्चा की। इस साक्षात्कार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया। साथ ही यह भी बताया कि कैसे युद्ध में फंसे देशों से भारतीय नागरिकों, छात्रों को वापस लाया जा सका।
इंटरव्यू में रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ''मैं दोनों राष्ट्रपतियों (रूस और यूक्रेन) के साथ बहुत दोस्ताना रहा हूं। मैंनें राष्ट्रपति पुतिन से खुले तौर पर कहा है कि यह युद्ध का समय नहीं है। मैं यूक्रेन से भी कहा है कि हमें बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। युद्ध के दौरान जब दोनों देशों के प्रमुखों से मैनें बात की और कहा कि हमारे युवा वहां फंस गए हैं, और मुझे आपकी मदद की जरूरत है। इसके बाद हमने मिलकर रास्ता निकाला।
आगे बोलते हुए पीएम ने कहा कि इस दौरान विदेशी धरती पर तिरंगे की ताकत भी देखने को मिली। उस समय भारतीय ध्वज की ताकत ही थी जो उनकी गारंटी बन गई और भारतीय सकुशल वापस आ सके। उस समय जंग के मैदान में भारतीय ध्वज की ताकत इतनी थी कि एक विदेशी भी अगर अपने हाथ में तिरंगा पकड़ लेता था, तो उसके लिए भी जगह बन जाती थी, इसलिए मेरा झंडा मेरी गारंटी बन गया।
2015 का किस्सा भी बताया
प्रधानमंत्री ने बताया कि जब मैंने सऊदी किंग से बात की और उनसे कहा कि मैं यमन से अपने लोगों को लाना चाहता हूं। और वहां आपकी बमबारी चल रही है। बमबारी के बीच हम ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं, आप हमारी कैसे मदद करेंगे? इस पर उन्होंने कहा, कृपया मुझे समझने की कोशिश करें। पीएम ने कहा कि वह दौर था जब भारत के कहने पर बमबारी रुक जाती थी और हम अपने लोगों को हवाई जहाज से बाहर ले जाते थे। तब हम यमन से लगभग 5000 लोगों को लाए। पीएम ने कहा कि ये सारी बातें सुषमा स्वराज ने अपने इंटरव्यू में बताईं हैं।