सरकार जनता से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार, विपक्ष का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण
लोकसभा में शुक्रवार को नियम 193 के तहत कोरोना वायरस महामारी पर चर्चा होनी थी। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोदी ने कहा, सरकार जनता से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है लेकिन विपक्ष का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। कोरोना महामारी जिससे देश का एक एक नागरिक प्रभावित है, विपक्ष ने खुद इस पर चर्चा की मांग की थी। लेकिन आज जब सदन में इस पर चर्चा होनी है तो विपक्षी सदस्य हंगामा कर रहे हैं और सदन नहीं चलने दे रहे हैं। जोशी ने कहा, विपक्ष को हंगामा बंद कर चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।
जवाब में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि विपक्ष मानसून सत्र के पहले दिन से ही पेगासस जासूसी मामले में चर्चा करने की मांग कर रहा है। इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में बयान देना चाहिए। अधीर ने कार्यवाही में बाधा के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। जोशी ने कहा, पेगासस कोई मुद्दा नहीं है। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले ही दोनों सदनों में इस पर विस्तृत बयान दे दिया है। विपक्ष को बहानेबाजी छोड़ कर कोरोना मामले में चर्चा के लिए तैयार होना चाहिए।
तीखी नोकझोंक के बीच वित्त मंत्री सीतारमण ने पेश किया बीमा संशोधन विधेयक
हंगामे और विपक्षी सदस्यों के साथ तीखी नोकझोंक के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साधारण बीमा कारोबार (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक पेश किया। इस विधेयक में बीमा क्षेत्र में निजी भागीदारी को 51 फीसदी से ज्यादा किए जाने का प्रावधान है। आरसीपी के एनके प्रेमचंद्रन और कांग्रेस के के सुरेश ने हंगामे के बीच विधेयक पेश करने पर आपत्ति जताई।
दोनों ने कहा, इससे बीमा कंपनियों के निजीकरण का रास्ता साफ हो जाएगा, जिससे भविष्य में कठिनाइयां बढ़ेंगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा, इसके महत्व को समझने की जरूरत है। हम इसके जरिए कुछ प्रावधान ला रहे हैं जिससे भारतीय नागरिकों, आम लोगों, निजी क्षेत्र की सहभागिता साधारण बीमा कंपनियों में बढ़ेगी। बीमा कंपनियों के तेज विकास के लिए संसाधन जरूरी हैं और निजी क्षेत्र से इन्हें धन और तकनीक मिल सकती है।
श्रम एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अध्यादेश से जुड़े राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंध के लिए आयोग विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा, इस विधेयक में खेत में फसल कट जाने के बाद पराली जलाने, यातायात प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क की धूल, जैव सामग्री जलाना जैसे विषय शामिल हैं। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सहयोगी एवं भागीदारीपूर्ण स्थाई और समर्पित तंत्र की कमी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठाने पर जोर दिया है। इसी के मद्देनजर वायु गुणवत्ता प्रबंध आयोग स्थापित करना जरूरी है।
मानसून सत्र की शुरुआत से राज्यसभा में जारी विपक्ष के हंगामे पर चिंता जाहिर करते हुए सभापति वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को सदस्यों को हंगामा खत्म करने की चेतावनी दी। नायडू ने कहा, विपक्षी सांसदों का व्यवहार से सदन की मर्यादा तार-तार हुई है। अगर इसे तुरंत खत्म नहीं किया गया तो मजबूरन उन्हें कार्रवाई करनी होगी। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी गुरुवार को विपक्ष के इस व्यवहार को लेकर चेतावनी दी थी।
नायडू ने कहा, कुछ सांसद सीटी बजा रहे थे, तो कुछ तख्तियों से दूसरे सदस्यों को सामने देखने से रोक रहे थे। कुछ ने तो मार्शल के कंधों पर हाथ तक रख दिया। कांग्रेस व टीएमसी के सदस्य वेल में आकर नारेबाजी कर रहे हैं। मैं सदस्यों से सदन की मर्यादा कायम रखने में सहयोग की अपील करता हूं। सदन और मेरे धैर्य की परीक्षा लेना बंद कर दें। वरना मुझे मजबूरन हंगामा करने वाले सदस्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी।
उन्होंने कहा, यह सदन की गरिमा के विपरीत है। मेरे पास दो विकल्प हैं, पहला यह सब चलने दूं और सदन को बाजार बना दूं। दूसरा, कार्रवाई करूं। किसी मुद्दे पर विरोध करना ठीक है लेकिन इस तरह सदन की गरिमा को तार-तार करने नहीं दिया जा सकता।