फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Monsoon: दिल्ली के आसमान में बदल गया 'बारिश का पैटर्न', इसलिए नहीं होती अब फुहारों वाली रिमझिम बरसात

सार

देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली बरसात और उसके बाद मची तबाही की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं। तेज होने वाली बरसात को लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि अब बारिश का ट्रेंड पूरी तरीके से बदल चुका है।
विज्ञापन
मानसून की बारिश। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश में होने वाली बारिश और बादलों के बरसने का पूरा ट्रेंड बदल गया है। कभी देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार पूरे पूरे दिन होने वाली फुहारों वाली बरसात अब झमाझम बारिश में तब्दील हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अपने अलग-अलग शोध और उनके निष्कर्ष इस बात की तस्दीक करते हैं कि बादलों के बरसने का यह पूरा पैटर्न पूरे देश में दिख रहा है। दक्षिण से लेकर उत्तर और पश्चिम से लेकर सुदूर पूर्व के हिस्सों में अब लगातार मोटी-मोटी बूंदों के साथ बहुत तेज बारिश होती है। मौसम पर नजर बनाए रखने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक बीते दो दशक में यह पैटर्न पूरी तरीके से बदला है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक दिल्ली में हुई जून के आखिरी सप्ताह की बारिश इसी पैटर्न का एक खतरनाक उदाहरण थी, जो कि दिल्ली के आसमान में बादलों के बरसने के बदले हुए पैटर्न का इशारा कर रही है। वैज्ञानिकों को आशंका है जिस तरीके से यह पैटर्न बन रहा है वह खतरनाक भी है। वहीं, मौसम विभाग के मुताबिक अगले एक सप्ताह के भीतर देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली बारिश के साथ हवाओं की स्पीड औसतन 60 किलोमीटर प्रति घंटा रहने वाली है।
विज्ञापन


देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली बरसात और उसके बाद मची तबाही की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं। तेज होने वाली बरसात को लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि अब बारिश का ट्रेंड पूरी तरीके से बदल चुका है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के वैज्ञानिक डॉक्टर अक्षित संगोलन बताते हैं कि उनकी अपनी स्टडी और किए गए शोध इस बात का प्रमाण हैं कि अब बरसात का पूरा पैटर्न बदला हुआ है। वह कहते हैं कि उन्होंने बीते कुछ समय में बरसात के बदले हुए ट्रेंड पर शोध किया। उसे शोध के मुताबिक न सिर्फ हवाओं की गति में बदलाव पाया गया, बल्कि उसके परिणाम स्वरुप बारिश के पैटर्न में भारी बदलाव देखा गया। अक्षित संगोलन कहते हैं कि उन्होंने पाया कि दक्षिण भारत के शहरों में जिसमें बंगलौर समेत कई शहरों में डेढ़ से दो दशक पहले फुहार वाली रिमझिम बरसात पूरे-पूरे दिन हुआ करती थी। लेकिन अब बदले पैटर्न से वहां रिमझिम बरसात की जगह पर झमाझम बारिश होती है।

वह कहते हैं कि सिर्फ बेंगलुरु ही नहीं, बल्कि देश के ऐसे कई और राज्य हैं, जहां पर रिमझिम बरसात का दौर पूरी तरीके से खत्म हो गया है। अपने लंबे समय तक किए गए शोध के नतीजे में पता चला कि जिन जगहों पर पूरे दिन होने वाली रिमझिम बरसात की जगह पर तेज बारिश हो रही है, वहां के वातावरण में जबरदस्त रूप से नमी बढ़ गई है। उनका कहना है कि नमी बढ़ने से फुहारों वाली बारिश का रूप बदलकर तेज बारिश वाला हो गया। वह कहते हैं कि इसके साथ हवाओं के बनने वाले प्रेशर का दायरा भी सिमटता जा रहा है। उनका कहना है कि "लार्ज स्केल विंड सिस्टम" में भी भारी बदलाव देखने को मिल रहा है। अक्षित कहते हैं कि आज से तकरीबन डेढ़ से दो दशक पहले हवाओं का यह सिस्टम बड़े स्केल में होता था, वह सिमटता जा रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह ग्लोबल वार्मिंग है। उनका कहना है कि यह सब बदलते हुए तापमान से हो रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरीके से यह पूरा सिस्टम बदल रहा है, उससे आने वाले दिनों में बारिशों का भी और भी बदला हुआ पैटर्न दिख सकता है।
विज्ञापन


वरिष्ठ भू वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र पाटील बताते हैं कि इस साल प्री-मानसून में जिस तरीके से बारिशों ने अपना अलग-अलग हिस्सों में रौद्र रूप दिखाया वह भी चिंता का विषय है। उनका कहना है कि हवाओं की बढ़ती हुई स्पीड से बादलों के बरसने पर भी सीधा असर दिखता है। वह कहते हैं कि प्री मानसून के दौर में सबसे ज्यादा बारिश थंडरस्टॉर्म की वजह से होती है। हाल में इस तरीके की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे बारिश अचानक बहुत तेज होने लगी है। वह भी मानते हैं कि इससे फुहार वाली बारिश का दौर खत्म हो चुका है। हवाओं की लगातार बढ़ रही स्पीड से बारिश के समूचे पैटर्न में बदलाव देखा जा रहा है। वैज्ञानिक डॉक्टर जितेंद्र पाटील कहते हैं कि मैदानी इलाकों से लेकर समुद्री इलाके और पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली बारिश इसका बड़ा उदाहरण है। उनका कहना है कि बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के हिस्सों में बारिश इसी बदले हुए लार्ज स्केल विंड सिस्टम की वजह से सबसे ज्यादा और तेज हुई है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के वैज्ञानिक डॉक्टर अक्षित कहते हैं कि बारिश के बदलते हुए ट्रेड का बड़ा उदाहरण जून के आखिरी हफ्ते में दिल्ली में हुई भारी बरसात है। वह कहते हैं कि 27 जून को दिल्ली में जिस तरीके की बरसात हुई, वह एमएससीएस (मिजो स्केल कन्वेटिव सिस्टम) था। वह कहते हैं कि इसमें एक तरीके से जबरदस्त बारिश होती है। बहुत ज्यादा बारिश तबाही भी मचाती है और पूरे क्षेत्र में होने वाली बारिशों का बड़ा हिस्सा कुछ घंटे में ही बरस जाता है। वह बताते हैं कि दिल्ली में इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट के वैज्ञानिकों ने 1 जून से 10 जुलाई तक दिल्ली के दो अलग-अलग हिस्सों में बारिश के पैटर्न को स्टडी किया। इस स्टडी को करने वाले डॉक्टर अक्षित कहते हैं कि दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट और पश्चिमी हिस्से में होने वाली बारिश को आंका गया। इसमें पता चला कि हवाओं में नमी के उतार चढ़ाव की वजह से दोनों इलाकों में हुई बारिश में जबरदस्त अंतर था। वह कहते हैं कि उनकी स्टडी से इस बात की पुष्टि होती है कि दिल्ली के वातावरण में इस तरीके के बदलाव देखने को मिले हैं, जिससे यहां की बारिश का पूरा पैटर्न बदला है। नमी से लेकर हीट के उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। वे कहते हैं कि इसी उतार-चढ़ाव की वजह से दिल्ली और एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों में बारिशों का पूरा पैटर्न बदल चुका है।

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले एक सप्ताह तक उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक इन हिस्सों में खासतौर से पहाड़ी हिस्सों में भूस्खलन जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर भारत में होने वाली बरसात के दौरान हवाओं की स्पीड भी औसतन 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा रहने वाली है। मौसम विभाग के मुताबिक मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के हिस्सों में अगले 7 दिनों तक लगातार बारिश का अनुमान लगाया गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें