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Modi 3.0: मंत्रालयों के बंटवारे में पुराने सिपहसालारों पर मोदी का भरोसा, मंत्रिमंडल में किंग मेकर की परवाह नही

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 10 Jun 2024 10:41 PM IST

सार

Modi 3.0:  कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी, मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में सड़क परिवहन मंत्री रहे हैं, अब उन्हें तीसरी बार यह मंत्रालय सौंपा गया है। इसी तरह रक्षा मंत्रालय राजनाथ सिंह के पास ही रहेगा।
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कई मंत्रियों को फिर मिला वहीं मंत्रालय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स


मोदी मंत्रिमंडल में एनडीए के 11 सहयोगी शामिल किए गए हैं। इन्हें कोई अहम मंत्रालय नहीं दिया गया है। टॉप मिनिस्ट्री जैसे, गृह, रक्षा, वित्त, सड़क परिवहन, स्वास्थ्य, रेल, कृषि एवं ग्रामीण विकास, सूचना प्रसारण मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग, पर्यावरण, कोल, जल शक्ति और पैट्रोलियम मंत्रालय जैसे अहम विभाग भाजपा सांसदों को सौंपी गई है। किरेन रिजिजू को संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री बनाया गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को टेलीकॉम एवं आईटी मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा सांसद अन्नपूर्णा देवी को महिला बाल विकास मंत्रालय मिला है। पिछली बार यह मंत्रालय भाजपा की स्मृति ईरानी के पास था। इस बार वे यूपी की अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव हार गई हैं। जानकारों का कहना है कि पीएम मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान कामकाज का जो एजेंडा तय किया था, अब तीसरे कार्यकाल में उसे आगे बढ़ाया है। 


रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत, थियेटर कमांड, चीन के साथ सीमा विवाद, अहम रक्षा सौदे और अग्निपथ जैसी कई योजनाएं आगे बढ़ी थीं। ऐसे में पीएम मोदी ने रक्षा मंत्री के तौर पर राजनाथ सिंह को ही दोबारा से मौका दिया है। इसी तरह गृह मंत्रालय की कमान अमित शाह को ही दी गई है। पिछले कार्यकाल में जम्मू कश्मीर, उत्तर पूर्व और नक्सल को लेकर अमित शाह ने अहम फैसले लिए थे। अमित शाह ने कहा था कि तीन वर्ष के भीतर, नक्सलवाद को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा। इसी तरह का प्लान, जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को लेकर रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले सीएए लागू किया गया है। इसे किस तरह तेजी से आगे बढ़ाना है, शाह ने इस बाबत पिछले कार्यकाल में ही खाका खींच दिया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी पहले वाली जिम्मेदारी, यानी वित्त मंत्रालय सौंपा गया है। नितिन गडकरी, पूर्व की भांति सड़क परिवहन के कामकाज को आगे बढ़ाते रहेंगे। 


एनडीए के सहयोगी एचडी कुमारस्वामी को भारी उद्योग और स्टील मंत्रालय दिया गया है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भी कुमारस्वामी पहली पंक्ति में बैठे थे। जीतनराम मांझी को एमएसएमई मंत्रालय दिया गया है। जेडीयू के ललन सिंह को पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशु पालन और डेयरी मंत्रालय दिया गया है। चिराग पासवान को फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। गुजरात से भाजपा के सांसद सीआर पाटिल, अब जल शक्ति मंत्रालय देखेंगे। पहले यह मंत्रालय गजेंद्र सिंह शेखावत के पास था। शेखावत को अब संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय सौंपा गया है। मनसुख मांडविया जो मोदी 2.0 में स्वास्थ्य मंत्री थे, अब उन्हें श्रम एवं रोजगार मंत्री बनाया गया है। 


जी किशन रेड्डी, जो मोदी 2.0 में गृह राज्य मंत्री रहे थे, बाद में उन्हें संस्कृति मंत्रालय की कमान सौंपी गई थी, इस बार उन्हें कोयला और खनन मंत्रालय दिया गया है। पीएम मोदी ने डॉ. जितेंद्र सिंह के मंत्रालयों में बदलाव नहीं किया है। अर्जुनराम मेघवाल को पहले की तरह कानून मंत्रालय 'स्वतंत्र प्रभार' के राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्रिमंडल गठन से पहले रेल, कृषि और वित्त जैसे मंत्रालयों पर रार मचने की बात कही जा रही थी। इन मंत्रालयों के लिए एनडीए के सहयोगी दल, विशेषकर जेडीयू और टीडीपी की तरफ लॉबिंग करने की चर्चा आरंभ हो गई थी। पीएम मोदी ने पहले मंत्रिमंडल के गठन में और अब विभागों के बंटवारे में एनडीए के सहयोगियों को उनके मनमुताबिक ज्यादा कुछ नहीं दिया। शिक्षा मंत्रालय पहले धमेंद्र प्रधान के पास था। इस बार भी उन्हें वही जिम्मेदारी मिली है। एनडीए के सहयोगी जयंत चौधरी को स्किल डेवेलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप और शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री का कार्यभार दिया गया है। केंद्र में अहम मंत्रालय, भाजपा ने अपने पास रखे हैं। यानी विभागों के बंटवारे में भी मोदी ने किसी दबाव को नहीं माना है।

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