गौरतलब है कि कोरोना काल में लगभग बर्बाद हो चुके टूरिज्म सेक्टर को उबारने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। आंकड़ों की बात करें तो हर साल सिर्फ बिहार के बोधगया में ही करीब साढ़े छह लाख पर्यटक पहुंचते हैं, जबकि देशभर के बौद्ध स्थलों में आने वालों का आंकड़ा 40 से 50 लाख के आसपास है। कोरोना काल में इस आंकड़े में काफी गिरावट आ चुकी है। ऐसे में अब सरकार का फोकस इस संख्या को और ज्यादा बढ़ाने पर है, जिससे कोरोना का कहर कम होने के बाद विदेशी टूरिस्ट एक बार फिर तेजी से आ सकें। ऐसे में केंद्र सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलप कर रही है और सुविधाओं पर अपना ध्यान बढ़ा रही है।
जानकारी के मुताबिक, युवाओं को विदेशी भाषाएं सिखाने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। इसके तहत युवाओं को लिंग्विस्ट टूरिस्ट फेसिलिटेटर यानी भाषाई पर्यटक सूत्रधार बनाया जा रहा है, जिसमें उन्हें थाई, जापानी, वियतनामी और चाइनीज आदि भाषाएं सिखाई जा रही हैं। इससे भारत आने वाले विदेशियों को उनकी ही भाषा में जानकारी मिलेगी, जिससे उन्हें पर्यटन स्थल घूमने-फिरने में ज्यादा आनंद आएगा।
बताया जा रहा है कि इस योजना के तहत 2018 से 2020 तक कुल 525 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अब 2023 तक 600 और लोगों को सिखाने की योजना है। पर्यटन मंत्रालय के सचिव अरविंद सिंह ने बताया कि यह बेहद अहम कदम है। खासतौर पर बौद्ध धर्म से संबंधित पर्यटन स्थलों के लिए। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म के अनुयायी एशिया के बड़े हिस्से में हैं। दुनियाभर में 97 फीसदी बौद्ध अकेले पूर्वी और दक्षिण पूर्व एशिया में रहते हैं। ऐसे में पर्यटकों के साथ भाषाई जुड़ाव विकसित करना काफी अहम है।