जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) को मिजोरम विधानसभा की 40 में से 27 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला। इसके अलावा मिजो नेशनल फ्रंट को 10, भाजपा को भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली। भाजपा ने पलक और सैहा सीट अपने नाम की, जबकि कांग्रेस ने लांग्तलाई वेस्ट सीट पर जीत हासिल की।
मिजोरम विधानसभा के लिए मतदान सात नवंबर को हुआ था
मिजोरम विधानसभा के लिए मतदान सात नवंबर को हुआ था। इस दौरान 8.57 लाख मतदाताओं में से 80 फीसदी से ज्यादा ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। चुनाव में 18 महिलाओं सहित कुल 174 उम्मीदवार मैदान में थे।
एमएनएफ, जेडपीएम और कांग्रेस ने 40-40 सीटों पर चुनाव लड़ा
एमएनएफ, जेडपीएम और कांग्रेस ने 40-40 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि भाजपा ने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। आम आदमी पार्टी (आप) ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसके अलावा 17 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे।
एन. बीरेन सिंह बोले- सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वाली पार्टी की हुई हार
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मिजोरम में आए चुनावी नतीजों के बाद कहा है कि सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के मकसद से राजनीतिक कार्ड खेलने वाले राजनीतिक दल और उसके नेता को हार का सामना करना पड़ा। जबकि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली एक नई पार्टी मिजोरम में नई सरकार बनाने के लिए विजयी हुई।
बीरेन सिंह ने किसी पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि मिजोरम में पार्टी जो मणिपुर में हिंसा के बारे में काफी मुखर थी, उसे सोमवार को घोषित विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। तीन राज्यों में भाजपा की जीत के बाद इंफाल में भाजपा कार्यकर्ताओं के जश्न के दौरान एन बीरेन ने कहा कि हिंसा भड़काने और मणिपुर को बांटने वाली पार्टी मिजोरम में हार गई।