भले ही पिछले दिनों दो चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच बेहद तीखा विवाद देखने को मिला हो, लेकिन जल्द ही हो सकता है आपको एलोपैथिक पद्धति से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्र भारतीय चिकित्सा पद्धतियों (आयुष) में इंटर्नशिप करते दिखाई देंगे। इसके लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने एक विनियमन मसौदा पेश किया है।
एनएमसी के अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप मसौदा-2021 के तहत पेश प्रस्ताव के मुताबिक, एमबीबीएस छात्रों के लिए रोटेशनल शेड्यूल के हिस्से के तौर पर किसी भी भारतीय चिकित्सा पद्धति या आयुष में एक सप्ताह का प्रशिक्षण वैकल्पिक तौर पर शामिल होना चाहिए। आयुष के लिए एनएमसी ने कहा है कि इंटर्न डॉक्टर आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और सोवा रिग्पा में किसी एक का एक सप्ताह के लिए विकल्प के तौर पर चयन कर सकते हैं।
मसौदे में यह भी कहा गया है कि अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप के 12 महीने के न्यूनतम सेवाकाल को पर्याप्त उपस्थिति नहीं होने, संतोषजनक आवश्यक योग्यता पूरी नहीं करने, योग्यता मूल्यांकन में असफल रहने और महामारी आदि जैसे समय आवश्यकता को देखते हुए बढ़ाया भी जा सकता है।
17 तैनाती पूरी करनी होंगी एमबीबीएस छात्र को
प्रस्ताव के मुताबिक, एमबीबीएस करने के बाद 12 महीने के दौरान इंटर्न डॉक्टर के तौर पर 17 तैनाती होंगी। इनमें से 14 तैनाती अनिवार्य होंगी, जबकि 3 वैकल्पिक तौर पर शामिल होंगी। भारतीय चिकित्सा पद्धति का प्रशिक्षण भी इन वैकल्पिक तैनातियों में ही शामिल होगा।