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धरती से टकरा सकता है भीषण सौर तूफान: जीपीएस और फोन सिग्नल नहीं करेंगे काम, पावर ग्रिड भी होगा कमजोर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Tue, 13 Jul 2021 09:55 AM IST

सार

Solar Storm News: 3 जुलाई को सूरज के दक्षिणी हिस्से में एक बड़ा विस्फोट देखा गया। इसकी वजह से सोलर फ्लेयर्स यानी सौर किरणें तेजी से धरती की ओर बढ़ रही हैं। ये मंगलवार और बुधवार के बीच यानी 13 जुलाई को किसी भी समय धरती पर कुछ मिनटों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं। 
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सौर तूफान - फोटो : अमर उजाला

सूरज से निकली एक गर्म और तेज तूफान की लहर मंगलवार और बुधवार के बीच धरती से टकरा सकता है। इसके चलते जीपीएस सिस्टम, मोबाइल नेटवर्क और सैटेलाइट टीवी प्रभावित हो सकते हैं। इनकी सेवाएं बाधित हो सकती हैं। सौर तूफान के चलते धरती के ऊत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर नॉर्दन और सदर्न लाइट्स की मात्रा और फ्रीक्वेंसी बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जुलाई को सूरज के दक्षिणी हिस्से में एक बड़ा विस्फोट देखा गया। इसकी वजह से सोलर फ्लेयर्स यानी सौर किरणें तेजी से धरती की ओर बढ़ रही हैं। ये मंगलवार और बुधवार के बीच यानी 13 जुलाई को किसी भी समय धरती पर कुछ मिनटों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं। 



स्पेशवैदर डॉट कॉम के मुताबिक, सूरज की तरफ आने वाले इस तूफान से धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर असर पड़ सकता है, जो लोग उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव के आसपास रहते हैं, उन्हें रात में आसमान में खूबसूरत औरोआ देखने को मिल सकता है, लेकिन यह खूबसूरती अपने साथ कई तरह की दिक्कतें भी लेकर आ रही है।

जीपीएस और मोबाइल नेटवर्क नहीं करेगा काम!
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, यह सौर तूफान धरती की तरफ 16 लाख किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आ रहा है, जोकि कुछ समय में और ज्यादा तेज हो जाएगा। जैसे ही यह तूफान धरती के चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करेगा, इसकी वजह से सैटेलाइट सिग्नल बाधित होंगे, जिससे जीपीएस, टीवी, मोबाइल नेटवर्क में दिक्कत आ सकती है।

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सौर तूफान - फोटो : अमर उजाला
सूरज से निकली एक गर्म और तेज तूफान की लहर मंगलवार और बुधवार के बीच धरती से टकरा सकता है। इसके चलते जीपीएस सिस्टम, मोबाइल नेटवर्क और सैटेलाइट टीवी प्रभावित हो सकते हैं। इनकी सेवाएं बाधित हो सकती हैं। सौर तूफान के चलते धरती के ऊत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर नॉर्दन और सदर्न लाइट्स की मात्रा और फ्रीक्वेंसी बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जुलाई को सूरज के दक्षिणी हिस्से में एक बड़ा विस्फोट देखा गया। इसकी वजह से सोलर फ्लेयर्स यानी सौर किरणें तेजी से धरती की ओर बढ़ रही हैं। ये मंगलवार और बुधवार के बीच यानी 13 जुलाई को किसी भी समय धरती पर कुछ मिनटों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं। 

स्पेशवैदर डॉट कॉम के मुताबिक, सूरज की तरफ आने वाले इस तूफान से धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर असर पड़ सकता है, जो लोग उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव के आसपास रहते हैं, उन्हें रात में आसमान में खूबसूरत औरोआ देखने को मिल सकता है, लेकिन यह खूबसूरती अपने साथ कई तरह की दिक्कतें भी लेकर आ रही है।

जीपीएस और मोबाइल नेटवर्क नहीं करेगा काम!
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, यह सौर तूफान धरती की तरफ 16 लाख किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आ रहा है, जोकि कुछ समय में और ज्यादा तेज हो जाएगा। जैसे ही यह तूफान धरती के चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करेगा, इसकी वजह से सैटेलाइट सिग्नल बाधित होंगे, जिससे जीपीएस, टीवी, मोबाइल नेटवर्क में दिक्कत आ सकती है।

बाधित हो सकती है बिजली की सप्लाई

सौर तूफान की वजह से धरती का बाहरी वायुमंडल गर्म हो सकता है, जिसका सीधा असर अलग-अलग देशों द्वारा भेजे गए सैटेलाइट्स पर पड़ेगा। इसकी वजह से जीपीएस के सहारे चलने वाले विमानों, जहाजों, मोबाइल फोन और सैटेलाइट टीवी आदि की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। ये भी हो सकता है कि कुछ देशों में बिजली की सप्लाई बाधित हो जाए और लोगों को अंधेरे का सामना करना पड़े। 

जियोमैग्नेटिक तूफान की वजह से होगी यह दिक्कत
सौर तूफान की वजह से धरती पर एक और तूफान का खतरा पैदा होगा, जिसे जियोमैग्नेटिक तूफान कहते हैं। जब सूरज से आने वाले चार्ज्ड पार्टिकल्स धरती की चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तब जियोमैग्नेटिक तूफान आता है। इसकी वजह से धरती के चुंबकीय क्षेत्र में कुछ देर के लिए बाधा उत्पन्न होती है, जिससे लैटीट्यूट और लॉन्गीट्यूड समझने में दिक्कत होती है। इससे जीपीएस काम करना बंद कर देता है।




अमेरिका में बाधित हुआ रेडिया कम्युनिकेशन
यह सौर तूफान जब 3 जुलाई को सूरज से शुरू हुआ था, तब अमेरिका के कुछ हिस्सों में हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो कम्युनिकेशन में बाधा आई थी, लेकिन यह कुछ सेकेंड्स के लिए ही थी क्योंकि सूरज से आई लहर की वजह से एक्स-रे में बदलाव हुआ और उनकी वजह से रेडियो सिग्नल बाधित हो गए।

पहले भी आ चुके भयावह सौर तूफान

धरती पर सौर तूफान का सबसे भयावह रूप मार्च, 1989 में देखने को मिला था, तब सौर तूफान की वजह से कनाडा के हाइड्रो-क्यूबेक इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन सिस्टम 9 घंटे के लिए ब्लैक आउट हो गया था। इसके बाद वर्ष 1991 में सौर तूफान की वजह से लगभग आधे अमेरिका में बिजली गुल हो गई थी, लेकिन यह सबसे बड़े तूफान नहीं थे। 
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